Phimosis in Hindi

फाइमोसिस क्या है

फाइमोसिस (Phimosis) या फिमोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें पेनिस की ऊपरी स्किन (Foreskin) बहुत ज्यादा टाइट हो जाती है और खतना न करने पर वह पीछे की तरफ नही हट पाती है। फाइमोसिस की समस्या आगे जाकर ज्यादातर उन बच्चों एवं वयस्कों को होती है जिनकी खतना (Circumcision) नहीं की गई हैं। इससे उनके पेनिस की स्किन एक समय के बाद इतनी ज्यादा टाइट हो जाती है कि वह पीछे की तरफ नही जा पाती है। 

बच्चों की शुरू के कुछ सालों में Glans (पेनिस  का सिरे वाला हिस्सा) और ऊपरी स्किन आपस में जुड़ी होती है। लेकिन स्किन पीछे न हटने के कारण वहां बार बार इंफेक्शन होने लगते हैं। इसकी वजह से मरीज को पेशाब करने में परेशानी होती है और साथ ही साथ यौन संबंधित बीमारी (Sexual Transmitted disease) होने का खतरा भी बना रहता है। 

विशेषज्ञों के अनुसार अगर फाइमोसिस का इलाज समय पर नही हुआ तो यह प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer) का कारण भी बन सकती है और ऐसी स्थिति में मरीज के पास सर्जरी ही एक अकेला उपाय बचता है। यह पुरुषों में होने वाला एक गुप्त रोग है जिसकी वजह से मरीज इस बारे में बात करने से शर्माते और कतराते हैं। और इस हरकत की वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

फाइमोसिस के प्रकार 

फाइमोसिस दो प्रकार के होते हैं।  

फिजियोलॉजिकल फाइमोसिस (Physiologic phimosis): यह बीमारी आमतौर पर बच्चों में होती है। जैसे जैसे वे बड़े होते हैं, उनकी फोरस्किन पीछे हटने लगती है। इसे पीछे हटने लायक बनने में लगभग 7 साल का समय लगता है लेकिन कभी कभी कुछ मामलों में यह 7 साल से ज्यादा समय भी ले लेती है। 

पैथोलॉजी फाइमोसिस (Pathologic phimosis): यह बीमारी संक्रमण, सूजन, लालिमा या घाव और उसके निशान की वजह से होती है। 

फाइमोसिस कितना सामान्य है (How normal phimosis is)

फाइमोसिस की समस्या उन लोगों में ज्यादा होती हैं जिनका खतना नही हुआ होता है। इससे होने वाले खतरे (risk) को रोकने के लिए जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चों में फाइमोसिस होना आम है जिसके लिए किसी उपाय की जरूरत नही होती क्योंकि समय के साथ ये अपने आप ही खत्म हो जाती है। लेकिन अगर यही बीमारी वयस्क को हो जाए तो यह आम बात नहीं होती है क्योंकि यह उत्तेजना तथा पेनिस के सामने वाली स्किन के इंफेक्शन से हो सकती है।   

फाइमोसिस किन कारणों से होता है? (Causes of Phimosis in Hindi)

किसी भी बीमारी के कारणों का पता चल जाए तो आसानी से रोकथाम का उपाय कर सकते हैं। यही बात फाइमोसिस पर भी लागू होती है। इसके भी कुछ कारण हैं जिन्हे जानने के बाद हम इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। 

  • घाव का निशान: इंफेक्शन से स्किन पर निशान पड़ने की वजह से स्किन खिंच सकती है। टाइट टिश्यू खींचते समय इसे और टाइट बना सकते हैं जो आगे फाइमोसिस होने का कारण बन सकता है।
  • कई बार फिमोसीस एजिंग के कारण भी हो सकता है। 
  • डायबिटीज के कारण पेनिस के टिप पर इंफेक्शन हो सकता है जो आगे जाकर फाइमोसिस का कारण बन सकता है।
  • सेक्स करते समय फोरस्किन ज्यादा देर तक पीछे रहने की वजह से फाइमोसिस की समस्या हो सकती है। 
  • प्राइवेट पार्ट में पियरसिंग करवाने से भी फाइमोसिस हो सकता है 
  • डायपर की वजह से बच्चों में अक्सर फाइमोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • साफ सफाई न होने की वजह से भी फाइमोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है 
  • जिसको बार बार यूरिन मार्ग में इंफेक्शन होता है उसे फाइमोसिस होने की संभावना ज्यादा होती है। 
  • जब स्किन इंफेक्शन होता है तो उससे फाइमोसिस होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। इसका इलाज स्किन संबंधित इलाज से किया जा सकता है।
  • एक्जिमा से पीड़ित व्यक्ति को फाइमोसिस होने के चांसेस होते हैं। इसलिए अगर आपको एग्जिमा है तो तुरंत उसका इलाज कराएं। 
  • बिना प्रोटेक्शन के यौनिक गतिविधियां करने से कई सारे इंफेक्शन हो सकते हैं, फाइमोसिस इसमें से एक है। 
  • फाइमोसिस ‘लाइकेन प्लेनुस’ नामक बीमारी की वजह से भी हो सकती है। अगर आप इससे पीड़ित हैं तो इसका इलाज कराएं और साथ ही अपने स्वस्थ का विशेष ध्यान भी रखें। 

फाइमोसिस के लक्षण (Symptoms of phimosis in Hindi)

किसी भी दूसरी बीमारी की तरह फाइमोसिस के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो इसके होने का संकेत देते हैं।

  • आमतौर पर फाइमोसिस में दर्द नहीं होता है लेकिन सेक्स या यूरिनेशन करते समय दर्द और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 
  • फाइमोसिस के कारण स्किन फटने लगती है और उत्तेजना में कमी भी हो सकती है। 
  • यूरिनेशन करते समय होने वाले दर्द को कई बार यूरिन इंफेक्शन का कारण भी समझा जाता है। लेकिन बार बार ऐसा सोचना गलत है क्योंकि कई बार यह फाइमोसिस का लक्षण भी हो सकता है। इसकी जांच जरूर  करवाएं। 
  • फिमोसीस के कारण स्किन की सफाई करने में परेशानी होती है और सफाई न होने की वजह से इंफेक्शन आसानी से हो जाता है। 
  • पेनिस में सूजन फाइमोसिस का लक्षण हो सकता है। 
  • फाइमोसिस होने की वजह से पेनिस पर लाल धब्बे बन जाते हैं।
  • पेनिस में दर्द होना और पेशाब करते समय जलन महसूस करना, फाइमोसिस के लक्षणों में से एक है। 
  • पेशाब से बदबू आना भी फाइमोसिस का लक्षण है। 
  • पेशाब का गाढ़ा बनना। 
  • पेशाब के दौरान फोरस्किन फूलना और सूजन। 
  • पेनिस के अगले हिस्से का रंग बदलते रहना। कभी गहरे लाल तो कभी हल्के नील रंग का होना।
  • फाइमोसिस होने के कारण सेक्स करते समय दर्द या कठिनाई हो सकती है। 

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें (When to visit doctors for phimosis in Hindi)

  • अगर यूरिन पास करने में दिक्कत आती है।
  • अगर सेक्स करने में दिक्कत आती है।
  • अगर पेनिस में सूजन आ जाए। 
  • अगर पेनिस की स्किन फटने लगे। 
  • अगर पेनिस पर रेडनेस दिखने लगे तो। 
  • अगर बच्चे की 2 साल की उम्र के बाद भी इसके लक्षण कम ना हों तो। 

फाइमोसिस का घरेलू इलाज (Home remedies for Phimosis in Hindi) 

किसी भी बीमारी से बचने के लिए शरीर का स्वस्थ होना सबसे अधिक आवश्यक है और यह एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के बाद ही मुमकिन है। इसके लिए आपको नियमित तौर पर व्यायाम करना होगा और खान पान की चीज़ों में बहुत सेलेक्टिव होना पड़ेगा। साथ ही शराब, सिगरेट और दूसरी नशीली पदार्थों तथा सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से दूर रहना होगा। 

अगर आप रूटीन के तौर पर व्यायाम करेंगे और अपनी जीवनशैली को ठीक रखेंगे तो काफी हद तक खुद को फाइमोसिस से बचा सकते हैं। इसके बावजूद भी अगर आपको प्रॉब्लम हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और साथ ही अपने खान पान और सेहत का भी ध्यान रखें। 

फाइमोसिस की रोकथाम (Prevention of Phimosis in Hindi)

  • फाइमोसिस होने का सबसे बड़ा कारण शरीर का गंदा रहना है। कुछ खास बातों का पालन कर आसानी से फाइमोसिस की रोकथाम की जा सकती है। 
  • रोजाना पेनिस की सफाई करें ताकि वहां कोई गंदगी, इंफेक्शन या बीमारी न हो। 
  • खानपान का बहुत सही से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि खान पान का हमारे शरीर पर सीधा असर पड़ता है। 
  • नियमित तौर पर व्यायाम करना चाहिए क्योंकि यह सेहतमंद शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 
  • व्यायाम हमारी मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ साथ इम्युनिटी सिस्टम को भी बेहतर बनता है।
  • फाइमोसिस बीमारी वायरस या बैक्टेरिया के संक्रमण की वजह से भी हो सकती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप इनके संपर्क में न आएं। 
  • डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। खासकर अगर आपने हाल ही में पैराफाइमोसिस सर्जरी कराई है तो आप को तबतक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जबतक की आप पूरी तरह से ठीक नही हो जाते। 
  • जिसका खतना नही हुआ है उन्हें रोज अपनी फोरस्किन को पीछे हटाकर उसके नीचे के पेनिस के हिस्से को अच्छे धोना एवं साफ करना चाहिए। 
  • पेनिस में टैल्कम पावडर या किसी दूसरे प्रकार के डिओडोरेंट आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 
  • माता पिता को अपने बच्चे के फोरस्किन को तबतक जबरदस्ती पीछे हटाने की कोशिश नहीं करनी है जबतक फोरस्किन खुद इसके लिए तैयार न हो जाए। 
  • जबरदस्ती फोरस्किन को पीछे हटाने की वजह से पेनिस में गंभीर दर्द पैदा हो सकता है और साथ ही उसकी स्किन क्षतिग्रस्त भी हो सकती है।  

फाइमोसिस की जांच  (Diagnosis of Phimosis in Hindi)  

फाइमोसिस का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज की पिछली मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी लेता है। जिससे डॉक्टर को यह जानने में मदद मिलती है कि क्या मरीज को पहले कभी पेनिस में इंफेक्शन या चोट तो नही आई थी। साथ ही वह यौन गतिविधियों के समय होने वाले लक्षणों और प्रभावों के बारे में भी पूछ सकते हैं। 

फाइमोसिस की स्थिति को अच्छे समझने के लिए पेनिस और उसकी ऊपरी स्किन के साथ साथ एक शारीरिक परीक्षण भी किया जाता है जो कि बहुत ही आसान होता है और बहुत ही कम समय में पूरा भी हो जाता है। 

फाइमोसिस की जांच करने के लिए डॉक्टर कुछ अन्य दूसरे जरूरी जांच भी लिख सकता है जो नीचे दिए हुए हैं:

  • पेशाब में इंफेक्शन की जांच करने के लिए यूरिन टेस्ट 
  • पेनिस में बैक्टीरिया की उपस्थिति का पता लगाने के लिए डॉक्टर फोरस्किन से स्वैब की मदद से सैंपल लेकर उसकी जांच करते हैं।
  • वयस्क मरीज जिनके पेनिस की ऊपरी स्किन ज्यादा टाइट हो जाती है, उनके शुगर लेवल की जांच करने के लिए यूरिन और खून के सैंपल  लिए जाते हैं।  

फाइमोसिस का इलाज (Treatment of Phimosis in Hindi) 

आमतौर पर बच्चों में सामान्य फाइमोसिस के इलाज की जरुरत नहीं पड़ती है क्योंकि कुछ समय के बाद यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। बहुत सारे स्टेरॉयड क्रीम और स्किन पर लगाने वाली जेल मौजूद है जिसे दिन में दो बार पेनिस पर लगातार दो या तीन सप्ताह तक लगाने से फाइमोसिस से राहत मिलती है। फिर बिना तकलीफ किए जहां तक हो सके स्किन को धीरे धीरे पीछे की तरफ हटाकर त्वचा के सबसे टाइट हिस्से पर क्रीम की मोटी परत लगाएँ। अगर इससे उपचार नही हो पाए तो फिर इससे भी ज्यादा शक्तिशाली क्रीम का इस्तेमाल करें। 

बच्चों में ऐसी स्थिति में अक्सर डॉक्टर खतना करने का सुझाव देते हैं। अगर दो साल के बाद भी फाइमोसिस की समस्या बनी रहती है और खासकर अगर इसके कारण पेनिस इंफेक्शन या मूत्र पथ (Urinary tract) में इंफेक्शन हो तो डॉक्टर से मिलकर इसके बेहतर इलाज का सुझाव लें। 

प्लास्टिक सर्जरी या खतना का विकल्प

अगर क्रीम लगाने के बाद भी फाइमोसिस की समस्या ठीक ना हो तो खतना का फैसला लिया जाता है। खतना एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके जरिए फोरस्किन को काटकर हटाया जाता है। यह प्रक्रिया चोट आदि के कारण होने वाली फाइमोसिस का इलाज करने के लिए जरूरी है। 

खतना की मदद से ऐसे फाइमोसिस का भी इलाज किया जाता है जो बार बार मूत्र पथ (Urinary tract) या फोरस्किन में इंफेक्शन होने के कारण होता है। अगर फाइमोसिस के कारण आपके बच्चे को पेशाब करने में तकलीफ होती है तो भी खतना करवाने की जरूरत पड़ सकती है। भविष्य में फाइमोसिस से बचने के लिए मां बाप अक्सर 2 साल की उम्र में ही अपने बच्चों का खतना करवा देते हैं। 

बच्चों का खतना करते समय उनके पेनिस में एक सुन्न करने वाली दवा (Local anaesthetic) इंजेक्शन द्वारा लगाई जाती है। यह सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान होने वाले दर्द को कम कर देती है। लेकिन जब वयस्कों का खतना किया जाता है तब उनकी सर्जिकल प्रक्रिया के लिए जनरल अनेस्थेटिक की मदद से बेहोश किया जाता है। 

डॉकटर फोरस्किन को हटाने के लिए सर्जरी के दौरान उसे एक उपकरण से पकड़ते हैं और स्किन को काटकर पेनिस से अलग कर देते हैं। फिर glans (पेनिस  का सिरे वाला हिस्सा) के नीचे की त्वचा को पेनिस की स्किन के साथ सिलाई करने के बाद जख्म को पेट्रोलियम जैली या किसी दूसरे एंटीबायोटिक मलहम से भरी हुई रुई के टुकड़े के साथ बैंडेज बांध देते हैं। 

खतना की जगह प्लास्टिक सर्जरी का प्रयोग भी किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान फोरस्किन में एक या एक से ज्यादा छेद कर दिए जाते हैं। जिससे स्किन आसानी से पीछे हट जाती है।

 

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