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Our Varicocele Doctors in Jaipur

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चीरा नहीं लगता है, दर्द और ब्लीडिंग नहीं होती हैचीरा नहीं लगता है.
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उसी दिन इलाज और डिस्चार्जउसी दिन
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वैरीकोसेल क्या है?

अंडकोष की थैली (Scrotum) में नसों के आकार बढ़ने की स्थिति को मेडिकल की भाषा में वैरीकोसेल कहा जाता है।

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Overview

TAGS

जोखिम

बांझपन

ब्लड क्लॉट

नसों का टूटना

हार्मोन में असंतुलन

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन

अंडकोष का सिकुड़ना

वीर्य में शुक्राणुओं की अनुपस्थिति

दर्द रहित इलाज क्यों?

दर्द नहीं होता है

टांके नहीं आते हैं

45 मिनट की प्रक्रिया है

फास्ट रिकवरी

बहुत ही प्रभावशाली इलाज है

उसी दिन इलाज और डिस्चार्ज

मॉडर्न इलाज में देरी ना करें

दर्द से आराम

टेस्टिकुलर सूजन से राहत

संक्षिप्त और सुरक्षित प्रक्रिया

फर्टिलिटी को बेहतर बनाता है

दोबारा वैरीकोसेल होने की बहुत कम संभावना

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की संभावना को कम

प्रिस्टीन केयर क्यों चुनें?

सभी डायग्नोस्टिक टेस्ट पर 30% छूट

गोपनीय परामर्श उपलब्ध है

डीलक्स रूम की सुविधा है

सर्जरी के बाद फ्री फॉलो-अप्स

100% इंश्योरेंस क्लेम

सर्जरी के बाद तेज रिकवरी

बिना झंझट का इंश्योरेंस क्लेम

सभी प्रकार के इंश्योरेंस का लाभ

Pristyn Care टीम द्वारा सभी प्रकार के पेपरवर्क(on behalf of patient)

इंश्योरेंस के लिए कहीं भटकने की कोई जरूरत नहीं

कोई अग्रिम भुगतान नहीं

कारण

  • चोट लगना
  • खड़े होकर पानी पीना
  • एपिडिडीमाइटिस जैसा संक्रमण होना
  • बिना प्रोटेक्टिव गियर के एक्सरसाइज करना
  • स्पर्मेटिक कॉर्ड में रुकावट पैदा होना

लक्षण

  • अंडकोष की थैली में गाँठ होना
  • अंडकोष की थैली में सूजन होना
  • अंडकोष की थैली में हल्का दर्द होना
  • दिन के दौरान दर्द और सूजन बढ़ जाना
  • अंडकोष की थैली में टेढ़ी नसें दिखाई देना

उपचार

Surgeons performing varicocele surgery in operation theater

जांच

वैरीकोसेल का इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज की जांच करते हैं ताकि वे उसके वैरीकोसेल के ग्रेड और गंभीरता को अच्छी तरह से समझ सकें। सबसे पहले, डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानते हैं और वैरीकोसेल के लक्षणों तथा यह समस्या उन्हें कितनों दिनों से है आदि से संबंधित कुछ प्रश्न पूछते हैं। उसके बाद, सर्जन मरीज की शारीरिक जांच करते हैं। अंडकोष की थैली में पानी है या नहीं – इस बात की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट और एक्स-रे करते हैं। साथ ही, अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडकोष की थैली के सूजन की जांच करते हैं। शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर कोमलता की जांच करते हैं। वीर्य विश्लेषण (Semen Analysis Test) और हार्मोन परीक्षण (Hormone Test) की मदद से डॉक्टर कूप उत्तेजक हार्मोन (Follicle Stimulating Hormone) और कम टेस्टोस्टेरोन (Low Testosterone) का पता लगाते हैं। साथ ही, वैरीकोसेल के लक्षणों की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड भी करते हैं।

सर्जरी

परक्यूटेनियस इम्बोलिजेशन यह एक सुरक्षित सर्जिकल प्रक्रिया है जो वैरीकोसेल का इलाज करने के बाद स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी को बेहतर बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। इलाज खत्म होने के बाद मरीज को कुछ घंटों के लिए हॉस्पिटल में रुकने की आवश्यकता पड़ती है। फिर मरीज अपने घर जाने और सर्जरी के दो दिन बाद अपने दैनिक जीवन के कामों को दोबारा शुरू करने के लिए पूरी तरह से फिट हो जाते हैं। परक्यूटेनियस इम्बोलिजेशन की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले रेडियोलॉजिस्ट मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं और फिर उसके बाद उनके पेट के निचले हिस्से में एक बहुत ही छोटा सा कट लगाते हैं। कट लगाने के बाद, रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे की मदद से एक कैथिटर को मरीज के शरीर में डालते हैं और खराब नस से खून के प्रवाह को बंद करके उसे दूसरे स्वस्थ और अप्रभावित नस से जोड़ देते हैं।

लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी जब परक्यूटेनियस इम्बोलिजेशन या इलाज की दूसरी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करने के बाद भी वैरीकोसेल में किसी प्रकार का सकारात्मक बदलाव नहीं आता है तो विशेषज्ञ डॉक्टर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी यानी लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी का सुझाव देते हैं। यह वैरीकोसेल का सबसे सटीक, सफल इलाज है। इस सर्जरी के बाद दोबारा वैरीकोसेल होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले सर्जन मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं और फिर उसके बाद मरीज के पेट या ऊपरी जांघ में एक बहुत ही छोटा सा कट लगाते हैं। कट लगाने के बाद, सर्जन अल्ट्रासाउंड की मदद से लेप्रोस्कोप नामक उपकरण को मरीज के शरीर में डालते हैं और खराब नस से खून के प्रवाह को बंद करके उसे दूसरे स्वस्थ नस से जोड़ देते हैं। उसके बाद, सर्जन कट वाली जगह पर ड्रेसिंग कर देते हैं। इस पूरी सर्जिकल प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 45 मिनट का समय लगता है।

वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या ब्लीडिंग नहीं होती है। सर्जरी के दौरान या बाद में इंफेक्शन या दूसरे किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट्स का खतरा लगभग न के बराबर होता है। लेपरसोकोपिक सर्जरी सुरक्षित प्रक्रिया है। इसलिए सर्जरी के बाद मरीज को हॉस्पिटल में रुकने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज अपने घर जाने के लिए पूरी तरह से फिट हो जाते हैं। साथ ही, सर्जरी के 48 घंटों या दो दिन के बाद वे अपने दैनिक जीवन के कामों को बिना किसी परेशानियों का सामना किए दोबारा शुरू भी कर सकते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज को ठीक होने में काफी कम समय लगता है। यही कारण है कि हर कोई वैरीकोसेल इलाज कराने के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का चुनाव कर रहा है। लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी के निम्नलिखित फायदे हैं।

  • दर्द नहीं होता है
  • रिकवरी बहुत तेजी से होती है
  • उसी दिन इलाज और डिस्चार्ज
  • इंफेक्शन का खतरा शून्य होता है
  • हॉस्पिटल में रुकने की जरूरत नहीं
  • ब्लीडिंग लगभग न के बराबर होती है
  • लेप्रोस्कोपिक सर्जरी वैरीकोसेल का सबसे संक्षिप्त, सटीक, सुरक्षित और सफल इलाज है

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अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैरीकोसेल का बेस्ट इलाज क्या है?

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वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?

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वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक बड़ी सर्जरी है या छोटी सर्जरी?

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वैरीकोसेल के लिए मैं जयपुर में सबसे अच्छे डॉक्टर से कहां परामर्श कर सकता हूं?

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जयपुर के करीबी शहर, जहाँ हम वैरीकोसेल का उपचार प्रदान करते हैं

जयपुर में प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में वैरीकोसेल इलाज किया जाता है

वैरीकोसेल एक गंभीर बीमारी है जिसका समय पर उचित जांच और इलाज आवश्यक है। विशेषज्ञ का मानना है कि वैरीकोसेल स्पर्म की क्वालिटी, क्वांटिटी और दूसरे उन सभी फंक्शन को बुरी तरह से प्रभावित करता है जो आगे जाकर पुरुष में बांझपन यानि इनफर्टिलिटी का कारण बन सकते हैं। अगर आप वैरीकोसेल से पीड़ित हैं और जयपुर में इस इलाज चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर क्लिनिक से संपर्क करना चाहिए। जयपुर में स्थित प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का इलाज किया जाता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी वैरीकोसेल के इलाज का एक मॉडर्न और एडवांस तरीका है। इस सर्जरी से किसी भी ग्रेड के वैरीकोसेल इलाज किया जा सकता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद दोबारा वैरीकोसेल होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को बहुत ही अनुभवी और कुशल यूरोलॉजिस्ट की देखरेख में पूरा किया जाता है। वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक संक्षिप्त, सुरक्षित, आसान और सफल प्रक्रिया है।

जयपुर में वैरीकोसेल की बेस्ट सर्जरी कराएं

जयपुर में वैरीकोसेल की बेस्ट सर्जरी कराने के लिए आपको प्रिस्टीन केयर से संपर्क करना चाहिए। हमारे पास देश के सबसे अनुभवी और विश्वसनीय यूरोलॉजिस्ट हैं जो अपने सालों के अनुभव और मॉडर्न एवं एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की मदद से वैरीकोसेल को मात्र कुछ ही मिनटों में बहुत ही आसानी से हमेशा के लिए ठीक कर सकते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान मरीज को टांके नहीं आते हैं और ब्लीडिंग तथा दर्द भी नहीं होता है। जयपुर में स्थित हमारे प्रिस्टीन केयर में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का इलाज किया जाता है। यह जयपुर में वैरीकोसेल का सबसे बेस्ट सर्जिकल इलाज है। इस सर्जरी के बाद दोबारा वैरीकोसेल होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

जयपुर में वैरीकोसेल का मॉडर्न और एडवांस इलाज पाएं

जयपुर में वैरीकोसेल के क्लिनिक या जयपुर में वैरीकोसेल के हॉस्पिटल की कमी नहीं है। जयपुर के सैकड़ों क्लिनीक और हॉस्पिटल में वैरीकोसेल का इलाज किया जाता है। लेकिन प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में वैरीकोसेल का इलाज मॉडर्न और एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से किया जाता है। जयपुर में स्थित हमारे क्लिनीक पूरी तरह से आधुनिक और उन्नत चिकित्सा तकनीकों से सुसज्जित हैं। हमारे क्लिनिक में वैरीकोसेल इलाज किया जाता है। अगर आप जयपुर के बेस्ट क्लिनिक या हॉस्पिटल में अपने वैरीकोसेल का इलाज कराना चाहते हैं तो हमसे संपर्क कर सकते हैं।

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