प्रिस्टीन केयर में, 11वें सप्ताह में प्रेगेनेंसी को समाप्त करने के लिए सुरक्षित, प्रभावी और गोपनीयता के साथ सर्जिकल गर्भपात किया जाता हैं। हमारे पास भारत के सर्वश्रेष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ की टीम हैं, जिनके पास सुरक्षित प्रक्रिया और कानूनी गर्भपात विशेष अनुभव रखते है। 11वें सप्ताह के गर्भपात के लिए अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए आज ही हमारी टीम से संपर्क करें।
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11वें सप्ताह में गर्भवती महिला की प्रेगेनेंसी तीसरे महीने में प्रवेश कर जाती है। 11 वें सप्ताह में गर्भवती महिला को सामान्यता प्रारंभिक प्रेगेनेंसी का अनुभव होता है, जैसे कि बेबी बंप के आसपास दर्द, मतली, स्वभाव में बदलाव, स्तनों में दर्द आदि। 11वें सप्ताह में, बच्चा एक अंजीर के आकार का हो जाता है, जो लगभग 41 मिमी होता है। उंगलियां और पैर के नाखून बढ़ने शुरू हो जाता हैं। कान की आकृति भी बननी शुरू हो जाती हैं।
इस समय, डॉक्टर महिलाओं को अपने स्वास्थ और गर्भ में पल रहे भ्रूण के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए कुछ महत्वपूर्ण परीक्षण करवाने का सुझाव देते हैं।
गर्भपात का कारण चाहे जो भी हो, 11वें सप्ताह की प्रेगेनेंसी को लगभग हमेशा सर्जिकल गर्भपात तरीकों का उपयोग करके समाप्त किया जाता है। प्रिस्टीन केयर में, हम प्रेगेनेंसी के 11वें सप्ताह में सुरक्षित और प्रभावी सर्जिकल गर्भपात प्रदान करते हैं। हमारे विशेषज्ञ स्त्री रोग विशेषज्ञों से परामर्श करने के लिए, आज ही हमारे हेल्थ केयर कोऑर्डिनेटर की टीम से संपर्क करें!
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प्रेगनेंसी के 11वें सप्ताह में गर्भपात कई कारणों से किया जा सकता है। गर्भपात कराने के मुख्य कारणों में महिला एवं भ्रूण के स्वास्थ से संबंधित समस्याएं, बच्चे को पालने के लिए महिला का आर्थिक और भावनात्मक रूप से तैयार न होना इत्यादि। आइए इसके पीछे के कुछ सामान्य कारणों को विस्तार से जानते हैं कि आखिर एक महिला को प्रेगनेंसी के 11वें सप्ताह में गर्भपात क्यों करवाना पड़ता है:
एक महिला चाहे किसी भी कारण से गर्भपात क्यों न करवा रही हो, उसके निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, गर्भपात कराने वाली महिला को सही दिशा में आगे बढ़ने और गर्भपात कराने के बाद शारीरिक और मानसिक प्रभावों से निपटने के लिए अपने मित्रों एवं परिवार के सदस्यों या अपने स्वास्थ्य सेवा सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टर प्रेगनेंसी के 11वें सप्ताह में गर्भपात करने से पहले महिला की स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करते हैं, जिससे ये जानने में मदद मिलती है कि महिला का 11वें सप्ताह में गर्भपात करना सुरक्षित है या नहीं और उसे गर्भपात करवाने से कोई स्वास्थ्य समस्याएं तो नहीं होगी, इसलिए डॉक्टर महिला को गर्भपात करवाने से पहले नैदानिक परीक्षण करवाने की सिफारिश करते है। नैदानिक परीक्षण से डॉक्टर को ये जानने में मदद मिलती है कि महिला की गर्भावस्था की सही स्थिति क्या है और इसके साथ ही गर्भाशय के आंतरिक स्वास्थ्य स्थिति का पता चलता है जिससे गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान आने वाली जटिलता से बचाव किया जा सकता है। 11वें सप्ताह में गर्भपात से पहले किए जाने वाले कुछ सामान्य नैदानिक परीक्षण इस प्रकार हैं:
महिला का गर्भपात चाहे किसी भी कारण से क्यों न किया जा रहा हो, लेकिन उन्हें हमेशा लाइसेंस प्राप्त क्लिनिक और अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में सर्जिकल गर्भपात करवाना चाहिए। प्रिस्टीन केयर में, भारत के सर्वश्रेष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञों की एक टीम है, जिनके पास प्रेगनेंसी को समाप्त कराने की इच्छुक महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात करने का विशेष अनुभव है। हमारे सभी क्लीनिक को सर्जिकल गर्भपात करने के लिए लाइसेंस प्राप्त हैं और गर्भपात कराने वाली महिला के लिए सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध की जाती है। हमारे यहाँ शारीरिक जाँच एवं निदान एडवांस तकनीक से किया जाता हैं, और गर्भपात के लिए एडवांस सर्जिकल तकनीक का उपयोग किया जाता हैं।
प्रिस्टीन केयर की टीम के लिए महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस बात का विशेष ध्यान करते हैं कि गर्भपात कराने वाली महिला को सही देखभाल मिले। हम गर्भपात के भावनात्मक प्रभावों को भी समझते हैं और इसलिए गर्भपात से पहले हम महिला को भावनात्मक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। हम गर्भपात कराने वाली महिलाओं के लिए आरामदायक उपचार की प्रक्रिया उपलब्ध करते हैं:
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गर्भपात से पहले शारीरिक और भावनात्मक तैयारी के लिए तैयारी महत्वपूर्ण है। 11वें सप्ताह तक गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहा भ्रूण काफी बड़ा हो जाता है, और गर्भवती महिला को 3 महीने से अधिक समय तक हो चुका होता है, इसलिए इस बात की बहुत अधिक संभावना होती है कि अब महिला भ्रूण के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ चुकी होती है। इसलिए, गर्भपात के दुष्परिणामों से निपटने के लिए शारीरिक रूप के साथ-साथ भावनात्मक रूप से तैयार होने की आवश्यकता होती है। प्रेगेनेंसी के 11वें सप्ताह के गर्भपात की तैयारी के कुछ तरीकों में शामिल हैं:
प्रेगेनेंसी के 11वें सप्ताह में गर्भपात कराने के लिए डॉक्टर सर्जिकल गर्भपात का सुझाव देते हैं। 11वें सप्ताह में दवाईयों से गर्भपात नहीं किया जा सकता है। 11वें सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने के लिए दो प्रकार की सर्जरी – सक्शन एस्पिरेशन ऑफ सक्शन क्योरटेज और डाइलेशन एंड क्योरटेज का सुझाव दिया जाता है और इस स्तर पर प्रेगेनेंसी को बाहर निकालने के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। इन तरीकों का इस्तेमाल 14 से 16 सप्ताह तक की प्रेगेनेंसी को समाप्त करने के लिए किया जा सकता है। इन दोनों ही प्रक्रियाएं बाह्य महिला के आधार पर की जाती हैं, और महिला को अस्पताल में रहने की आवश्यकता नहीं होती है। गर्भपात की प्रक्रिया का चयन डॉक्टर महिला के स्वास्थ्य के मूल्यांकन के निर्भर पर करते है। आइए सर्जिकल गर्भपात की दोनों प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा करें:
सक्शन या एस्पिरेशन : प्रेगेनेंसी को हटाने की यह सर्जिकल तकनीक रूप से 12 से 14 सप्ताह की प्रेगेनेंसी को समाप्त करने के लिए सुझाई गई है। सर्जिकल गर्भपात की प्रक्रिया केवल कुछ मिनटों तक चलती है, और एनेस्थीसिया का प्रभाव समाप्त हो जाने पर महिला घर जा सकती है। सक्शन क्योरटेज या वैक्यूम एस्पिरेशन प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में की जाती है:
डाइलेशन और क्यूरेटेज: डाइलेशन और क्यूरेटेज (डी एंड सी) प्रक्रिया, एक सर्जिकल गर्भपात तकनीक है जिसे अक्सर 11वें सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने का सुझाव दिया जाता है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में 5 से 10 मिनट का समय लगता है। आइए देखें कि यह प्रक्रिया कैसे काम करती है:
सर्जिकल गर्भपात के बाद, महिला को मामूली रक्तस्राव से धब्बे के निशान देखने को मिल सकते है। सर्जिकल प्रक्रिया के बाद मासिक धर्म के दौरान पेट में हल्की सी ऐंठन भी हो सकती है। सामान्यता गर्भपात के बाद 4 से 6 सप्ताह के अंदर पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। अक्सर, महिलाओं को सर्जिकल गर्भपात कराने के बाद चिंता या उदासी के साथ-साथ अपराध बोध का भी अनुभव होता है। महिलाओं को गर्भपात के बाद के इन प्रभावों से निपटने और आरामदायक रिकवरी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। परेशानी मुक्त पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए गर्भपात के इन प्रभावों का प्रभावी प्रबंधन महत्वपूर्ण है। 11वें सप्ताह के गर्भपात के बाद के प्रभावों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के कुछ तरीकों में शामिल हैं:
किसी भी अन्य सर्जिकल प्रक्रिया की तरह, गर्भपात की सर्जरी के संभावित जोखिम एवं खतरा बना रहता है। लेकिन सर्जिकल गर्भपात के बाद किसी भी तरह की जटिलताएँ बहुत कम देखने को मिलती हैं, किसी भी समस्या से बचने के लिए महिला को उनके बारे में पता होना चाहिए। गर्भपात कराने वाली महिलाओं को गर्भपात के जोखिमों और जटिलताओं को समझने में मदद करने के लिए, हमने 11वें सप्ताह के गर्भपात के बाद होने वाली सामान्य समस्याओं की एक सूची बनाई है, जो इस प्रकार हैं:-
इस बात का विशेष ध्यान दें कि गर्भपात से संबंधित जटिलताओं के लिए तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए क्योंकि उपचार में देरी से परिस्थितियाँ और भी जटिल बना सकती हैं।
हाँ, भारत में गर्भवती महिलाएँ कानूनी तौर पर 11 सप्ताह की प्रेगेनेंसी को समाप्त करने के लिए सर्जिकल गर्भपात करा सकती हैं। प्रेगेनेंसी के 24वें सप्ताह में गर्भपात कराने के लिए कानून की अनुमति लेनी पड़ती है। हालाँकि, कुछ स्थितियाँ हैं जिनके तहत इसकी अनुमति है:
भारत के सभी क्लीनिकों और अस्पताओं में गर्भपात का खर्च अलग-अलग हो सकता है। प्रेगनेंसी के 9वें सप्ताह में गर्भपात की अनुमानित खर्च की राशि 10,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये के बीच हो सकती है, लेकिन गर्भपात का कुल खर्च महिला के स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अलग- अलग हो सकता है। गर्भपात का खर्च विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें महिला द्वारा चयनित जगह(शहर), डॉक्टर की फीस, गर्भपात से पहले आवश्यक शारीरिक परीक्षणों का शुल्क, किसी अतिरिक्त सर्जिकल प्रक्रिया का शुल्क आदि शामिल हैं।
ये सभी कारक सामूहिक रूप से गर्भपात के खर्च को प्रभावित करते हैं। किसी विशेष मामले के लिए अन्य कारक भी कुल व्यय को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, गर्भपात कराने वाली महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे गर्भपात कराने से पहले अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ गर्भपात के खर्च से संबंधी आवश्यक जानकारी पर चर्चा करें। ऐसा करके, वे सही निर्णय लेने में मदद मिल सकती हैं, और गर्भपात के लिए खुद को वित्तीय रूप से तैयार कर सकते हैं। प्रिस्टीन केयर में, हम किफायती कीमत पर प्रेगनेंसी के 9वें सप्ताह में सुरक्षित और प्रभावी गर्भपात करते हैं। गर्भपात कराने के लिए हमारे स्त्री रोग विशेषज्ञों से परामर्श लें या अपने नजदीक स्वास्थ्य सेवा केंद्र में गर्भपात की अनुमानित खर्च की राशि जानने के लिए, आज ही हमारी टीम से संपर्क करें।
गर्भपात के लिए स्वास्थ्य बीमा कवरेज इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भपात क्यों किया जा रहा है। सामान्यता, भारत में स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अपनी बीमा या मेडिक्लेम पॉलिसियों में गर्भपात को कवर नहीं करती हैं, क्योंकि कई महिलाएं व्यक्तिगत कारणों से गर्भपात कराने का निर्णय लेती हैं। क्योंकि इस प्रक्रिया को चिकित्सीय आवश्यकता नहीं माना जाता है, इसलिए इसे बीमा कवरेज से बाहर रखा गया है, इसलिए महिला को गर्भपात के खर्च का पूरा भुगतान करना पड़ सकता है।
लेकिन, महिला के स्वास्थ्य की गंभीरता के आधार पर, स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अपनी योजनाओं में गर्भपात के खर्च को कवर कर सकती हैं, खासकर यदि प्रक्रिया चिकित्सकीय रूप से आवश्यक कारणों से की गई हो। यदि इनमें गर्भवती महिला या भ्रूण के स्वास्थ्य के लिए जोखिम, भ्रूण की असामान्यताएं आदि शामिल हो सकते हैं। प्रेगनेंसी के 11वें सप्ताह में गर्भपात के लिए कवरेज से संबंधित जानकारी के लिए महिला को अपने स्वास्थ्य बीमा सलाहकार से संपर्क करना चाहिए।
प्रेगेनेंसी के 11वें सप्ताह में, डॉक्टर आमतौर पर प्रेगेनेंसी को हटाने के लिए सर्जिकल गर्भपात प्रक्रिया का सुझाव देते हैं। 11वें सप्ताह में प्रेगेनेंसी मेडिकल गर्भपात को प्रभावी नहीं माना जाता है, और मेडिकल गर्भपात से जटिलताओं की संभावना अधिक होती है। 11वें सप्ताह की प्रेगेनेंसी को समाप्त करने के लिए सक्शन एस्पिरेशन या डाइलेशन और क्यूरेटेज तरीकों का सुझाव दिया जाता है।
हाँ, प्रेगेनेंसी की सर्जिकल गर्भपात की प्रक्रिया शुरु करने से पहले एनेस्थीसिया दिया जाता है, ताकि सर्जरी के दौरान दर्द की रोकथाम से रोकथाम किया जा सके।
सर्जिकल गर्भपात से किसी गंभीर जटिलता उत्पन्न होने की अत्यधिक संभावना नहीं है। डॉक्टर आम तौर पर प्रक्रिया में पूरी सटीकता का उपयोग करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि महिला की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। फिर भी, जटिलताओं का खतरा बना रहता है, जैसे संक्रमण, बुखार, अत्यधिक रक्तस्राव, नजदीकी अंग को नुकसान आदि।
हाँ, भारत में नाबालिग गर्भपात करा सकती है लेकिन नाबालिक के गर्भपात के लिए उसके अभिभावकों (माता-पिता) की सहमति से और कानूनी स्वीकृति लेनी आवश्यक होती है।
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