अपेंडिसाइटिस

समीर को उनके मलाशय के आस पास दर्द होता था। समीर कहते हैं “शुरू में मैंने इस लक्षण को नज़रअंदाज़ किया। लेकिन जब दर्द तेज होने लगा तब मैंने इंटरनेट पर इसके बारे में पता करना शुरू किया और फिर मुझे पता चला कि यह दर्द अपेंडिसाइटिस की वजह से भी हो सकता है। जब मुझे यह पता चला तो मैं परेशान हो गया और मैंने तुरंत एक अच्छे डॉक्टर की तलाश शुरू कर दी और मेरी मुलाकात Pristyn Care के वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर वैभव से हुई। 

समीर और डॉक्टर वैभव के बीच बहुत से सवाल जवाब हुए। 

डॉक्टर वैभव बताते हैं “अपेंडिक्स (Appendix) एक पतली और छोटी आकार की ट्यूब है जो हमारे आंत (Intestine) के पास पाई जाती है। इसकी लंबाई औसतन 2-3 इंच होती है और यह हमारे लार्ज इंटेस्टाइन (Large Intestine) से जुड़ी होती है। जब अपेन्डिक्स में सूजन और दर्द उभरता है तो इसे अपेंडिसाइटिस (Appendicitis) कहते हैं। (और पढ़ें: पेट में सूजन के कारण और इलाज)

अपेंडिसाइटिस के शुरुआती दौर में हमारे पेट के निचले भाग में दर्द होता है। यह दर्द दौड़ने और चलने पर अधिक हो जाता है। खांसने पर भी तेज दर्द महसूस होता है। अपेन्डिक्स का हमारे शरीर में कोई खास कार्य नहीं है। इसलिए अपेंडिसाइटिस की समस्या होने पर इसे शरीर से निकाल दिया जाता है। ऐसा करने से आपको सूजन और दर्द की समस्या से निजात मिल जाती है।”

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अपेंडिसाइटिस के प्रकार — Types of Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस के दो प्रकार होते हैं।

  • तीव्र अपेंडिसाइटिस — Acute Appendicitis in Hindi

तीव्र अपेंडिसाइटिस को पूर्ण रूप से विकसित होने के लिए कुछ घंटे या दिन की जरूरत होती है। यह बहुत जल्दी विकसित हो जाता है तथा तुरंत ही दर्दनाक बन जाता है। जब अपेंडिक्स में बैक्टीरिया या जीवाणु उत्पन्न होने लगते हैं तो सूजन के साथ साथ मवाद भी बनने लगता है। अगर मवाद अधिक मात्रा में बने तो अपेन्डिक्स निर्जीव होने लगती है। 

  • स्थाई अपेंडिसाइटिस — Chronic Appendicitis in Hindi

स्थाई अपेंडिसाइटिस होने की समय सीमा बहुत लंबी है। जब अपेंडिक्स के आसपास मल, बैक्टीरिया, जीवाणु आदि संग्रह होने लगते हैं तब इसके आस पास के उतकों (Tissue) में सूजन निर्मित होने लगती है। इसके लक्षण बहुत कम और काफी दिनों के बाद नजर आते हैं। हालांकि, क्रॉनिक अपेंडिसाइटिस में अपेंडिक्स फटती नहीं है बल्कि दबाव के कारण उसका मार्ग खुल जाता है। इसलिए इसके लक्षण कभी कभी दिखाई देते हैं। क्रॉनिक अपेंडिसाइटिस का इलाज करने में कई महीने व साल का समय लग सकता है। हालांकि, एक्यूट अपेंडिसाइटिस का इलाज 2-3 दिनों के भीतर करना आवश्यक होता है।

अपेंडिसाइटिस के कारण — Causes of Appendicitis in Hindi

लार्ज इंटेस्टाइन और स्मॉल इंटेस्टाइन को आपस में जोड़ने के लिए एक ट्यूब होती है जिसे सीकम कहते हैं। अपेंडिक्स का मार्ग सीकम में जाकर खुलता है। इस क्षिद्र के बंद हो जाने पर ही अपेंडिसाइटिस की समस्या होती है। यह क्षिद्र तब बंद होता है जब किसी प्रकार का द्रव्य पदार्थ इसमें जम जाता है या फिर सीकम से आने वाला मल इस क्षिद्र के भीतर चला जाता है। सीकम में द्रव्य जम जाने के बाद सीकम पूरी तरह से कठोर हो जाता है जिसे फेकलिथ कहते हैं। (और पढ़ें: हर्निया के कारण, लक्षण, टेस्ट और इलाज)

इस वजह से अपेंडिक्स में सूजन उत्पन्न होने लगता है। अपेंडिक्स के भीतर पहले से ही बैक्टीरिया मौजूद होते हैं लेकिन क्षिद्र में रुकावट उत्पन्न होने के बाद इनकी मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। बैक्टीरिया की तादाद इतनी अधिक हो जाती है कि यह अपेंडिक्स की परतों पर पूरी तरह से कब्जा कर संक्रमण फैलाने लगते हैं। बैक्टीरिया के लगातार हमले के कारण सूजन और अपेंडिक्स फटने का खतरा बढ़ जाता है।

अगर अपेंडिक्स फटती है तो इसके अंदर मौजूद बैक्टीरिया पूरे पेट में फैल जाते हैं जो कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में यह बैक्टीरिया अपेंडिक्स के आसपास के टिश्यू में सिमटकर रह जाते हैं। 

अपेंडिसाइटिस के लक्षण — Symptoms of Appendicitis in Hindi

  1. अपेंडिसाइटिस होने पर नाभि के ऊपर हल्का दर्द महसूस होता है। सूजन फैलने के बाद यह दर्द पेट के निचले हिस्से तक पहुंच जाता है। 
  2. मलाशय के आसपास या पीठ की तरफ भी दर्द हो सकता है। 
  3. हमेशा हल्का  बुखार रहता है। 
  4. पेशाब करने में परेशानी होती है।
  5. अपेंडिसाइटिस पाचन शक्ति को प्रभावित करता है जिसके परिणाम स्वरूप कब्ज व गैस की समस्या होती है।
  6. बहुत कम भूख लगना।
  7. उल्टी और दस्त की समस्या होना।

अगर आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण को खुद में महसूस करते हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से मिलें। वरना आपको लंबे समय तक सूजन और दर्द का सामना करना पड़ सकता है। अपेंडिसाइटिस की समस्या होने पर दस्त लाने वाली दवाइयों (जुलाब की गोलियों) का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए। अगर आप जुलाब की गोलियों का सेवन करते हैं तो अपेंडिक्स के फटने की संभावना बढ़ जाती है।

अपेंडिसाइटिस से बचाव — Prevention of Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस से बचने का कोई भी ठोस उपाय मौजूद नहीं है। इससे बचने के लिए आप अपनी डाइट में फाइबर युक्त आहार शामिल कर सकते हैं। भोजन में मौजूद फाइबर आपके मल को कठोर बनने से रोकते हैं जिससे अपेंडिसाइटिस की समस्या से बचा जा सकता है। इससे बचना चाहते हैं तो समय समय पर अपेंडिसाइटिस की जांच भी करवाते रहें तथा खुद को हमेशा हाइड्रेट रखने की कोशिश करें।

अपेंडिसाइटिस का परीक्षण — Diagnosis of Appendicitis in Hindi

  1. अपेंडिसाइटिस का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपके लक्षणों का पता लगाने की कोशिश करते हैं। कितना तेज दर्द है? कितने समय से दर्द है? आपसे ऐसे सवाल पूछे जा सकते हैं। अगर आप किसी प्रकार की सर्जरी करवा चुके हैं या कठोर दवाइयों का सेवन करते हैं तो इसकी जानकारी अपने चिकित्सक को अवश्य दें।
  2. अपेंडिसाइटिस का पता लगाने के लिए चिकित्सक आपके पेट में दबाव उत्पन्न कर सकते हैं। अगर पेट के ऊपरी हिस्से को दबाने से तेज दर्द होता है तो यह दर्द अपेंडिसाइटिस के कारण हो सकता है।
  3. परुषों का डिजिटल रेक्टल टेस्ट (Digital Rectal Test) और महिलाओं का पेल्विक टेस्ट (Pelvic Test) किया जा सकता है।
  • कुछ लैब टेस्ट भी किए जा सकते हैं जो इस प्रकार हैं —

    • यूरिन टेस्ट — आपके मूत्र का परीक्षण कर डॉक्टर इस बात की पुष्टि करते हैं की कहीं मूत्र मार्ग में संक्रमण या किडनी स्टोन की वजह से तो सूजन की उत्पत्ति नहीं हो रही है। 
    • ब्लड टेस्ट — शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा में कमी आने पर संक्रमण होने और फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड टेस्ट कर डॉक्टर आपके शरीर मे WBC की मात्रा का पता लगा सकते हैं।
    • इमेजिंग टेस्ट — अपेंडिसाइटिस का पता लगाने के लिए इमेजिंग टेस्ट (Imaging Test) भी किया जा सकता है। इमेजिंग टेस्ट में डॉक्टर एक्सरे (X-Ray), सीटी स्कैन (CT Scan) और अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के माध्यम से आपके आंतरिक अंगों की स्थिति का पता लगाते हैं। इमेजिंग टेस्ट करने के बाद कई तरह के विकल्प सामने आ सकते हैं जैसे-
  1. अपेन्डिक्स का फटा होना, फैला होना या सूजन होना।
  2. अपेन्डिक्स में फोड़े होना जिससे जलन भी होती है।

अपेंडिसाइटिस के घरेलू उपचार — Home Remedies For Appendicitis in Hindi

घरेलू उपचार की मदद से अपेंडिसाइटिस के दौरान होने वाले दर्द और सूजन को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सर्जरी की मदद से अपेंडिसाइटिस का परमानेंट इलाज इलाज संभव है। आइए उन घरेलू नुस्खों के बारे में जानते हैं जो आपको अपेंडिसाइटिस के दौरान राहत दे सकते हैं।

लहसुन

लहसुन में एंटीबैक्टीरियल (Antibacterial) गुण मौजूद होते हैं। ये उन बैक्टीरिया से लड़ते हैं जो अपेंडिसाइटिस का कारण बनते हैं। यही वजह है की लहसुन के सेवन से दर्द और सूजन हो जाते हैं।

अदरक की चाय

अदरक में एंटीइंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) गुण पाए जाते हैं जो सूजन को कम करने का काम करते हैं। अदरक दर्द निवारक का भी काम करता है। अदरक वाली चाय पीने से अपेंडिसाइटिस के दौरान होने वाले दर्द और सूजन खत्म हो सकते हैं। अदरक की चाय बनाने के लिए एक कप पानी में एक चम्मच अदरक पाऊडर डालकर दस मिनट तक उबालें। अदरक की चाय दिन में तीन से चार बार पी सकते हैं।

मेथी दाना

प्राचीन काल से मेथी को दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। एक कप पानी में दो चम्मच मेथी दाना डालकर पानी को तब तक उबालते रहें जब तक पानी का रंग बदल नहीं जाता। जब पानी का रंग भूरा हो जाए तब आप उस पानी को पीएं। ऐसा करने से अपेंडिसाइटिस के दौरान होने वाला दर्द और सूजन दोनों ही दूर हो जाते हैं। इस पानी का दिन में के बार सेवन करें।

नींबू

अपेंडिसाइटिस के दौरान पेट से संबंधित समस्याएं दर्द को और तीव्र कर देती हैं। कब्ज की वजह से मलत्याग के दौरान व्यक्ति को भारी दर्द का सामना करना पड़ता है। नींबू पाचनतंत्र दुरुस्त और कब्ज को दूर रखता है जिससे दर्द कम हो जाता है। एक गिलास पानी में एक बड़े नींबू का रस निचोड़कर पीएं। अगर आप इसमें एक चम्मच शहद मिला लेंगे तो यह और भी कारगर हो जाएगा। शहद इम्युनिटी बढ़ाता है जिससे अपेंडिसाइटिस की बैक्टीरिया से संक्रमण होने का खतरा कम हो जाता है।

तुलसी

कई बार रोगी को अपेंडिसाइटिस के चलते बुखार का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में तुलसी की मदद से बुखार को आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके अलावा, तुलसी की चाय पीने से पाचन दुरुस्त होता है जिससे मल त्याग के दौरान रोगी को आराम होता है। एक मुट्ठी तुलसी की पत्ती और एक चम्मच अदरक पाऊडर को एक कप पानी में 5 मिनट तक उबालें। जब चाय गुनगुनी हो जाए तब उसे पी लें। आप इस चाय को दिन में तीन से चार बार पी सकते हैं।

पुदीना की चाय

पुदीना अपच और कब्ज को दूर करने के लिए एक बढ़िया औषधि है। पुदीना की चाय पीने से अपेंडिसाइटिस में होने वाला दर्द कम होता है। 15-20 पुदीने की पत्तियों को एक कप पानी में उबालकर पीएं। अगर आप एक चम्मच शहद मिला लेते हैं तो यह और भी कारगर हो जाएगा और इसके स्वाद में मीठापन भी आ जाएगा।

अपेंडिसाइटिस का परमानेंट इलाज — Permanent Treatment of Appendicitis in Hindi

अगर आपके अपेंडिक्स में नार्मल सूजन या दर्द है तो डॉक्टर आपको कुछ दवाईयां देते हैं जिसकी मदद से अपेंडिसाइटिस की समस्या दूर हो जाती है। लेकिन फिर भी समस्या दूर नहीं होती है तो सर्जन के पास सर्जरी का विक्लप बचता है। 

अपेंडिसाइटिस का ऑपरेशन — Operation of Appendicitis in Hindi

सर्जरी करने से पहले डॉक्टर मरीज को एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं जो सर्जरी के बाद रोगी के शरीर में किसी भी तरह के संक्रमण को फैलने से रोकता है। अपेंडिसाइटिस की सर्जरी (अपेन्डेक्टमी — Appendectomy) दो प्रकार से की जाती है।

  • ओपन अपेन्डेक्टमी — Open Appendectomy in Hindi
  • लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी — Laparoscopic Appendectomy in Hindi

ओपन अपेन्डेक्टमी — Open Appendectomy in Hindi

ओपन अपेन्डेक्टमी के दौरान सर्जन आपके पेट के दाहिने हिस्से के निचले भाग में एक कट लगाते हैं। फिर कुछ इंस्ट्रूमेंट्स की मदद से आपके अपेंडिक्स को बाहर निकाल दिया जाता है और टांकों की मदद से आपके पेट को सिल दिया जाता है। ज्यादातर मामलों में लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी ही की जाती है। लेकिन अगर आपका अपेंडिक्स फट गया है तो फिर इस स्थिति में ओपन अपेन्डेक्टमी का ही सहारा लिया जाता है।

लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी — Laparoscopic Appendectomy in Hindi

लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी के दौरान डॉक्टर आपके पेट के निचले हिस्से में एक छोटा सा कट लगाते हैं और कैनुला नामक एक ट्यूब की मदद से पेट में कार्बन-डाइऑक्साइड (Carbon-dioxide) डाली जाती है ताकि रोगी के पेट के भीतर सभी अंग साफ साफ देखे जा सकें। जब गैस से पेट फूल जाता है तब रोगी के पेट में लैप्रोस्कोप डाला जाता है। लैप्रोस्कोप की मदद से अपेंडिक्स को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जाता है। अब डॉक्टर एक छोटा सा कट लगाते हैं और कुछ उपकरणों की मदद से अपेंडिक्स को काटकर बाहर निकाल देते हैं। 

अपेन्डेक्टमी के बाद क्या होता है — What Happens After Appendectomy in Hindi

अपेन्डेक्टमी के बाद कुछ घंटों तक डॉक्टर आपको हॉस्पिटल में रखते हैं। इस दौरान वे आपकी सेहत को मॉनिटर करते हैं और कुछ जरूरी दवाओं (जो सर्जरी के बाद दी जाती है) देते हैं। अगर आप ओपन अपेन्डेक्टमी के जरिये सर्जरी कराते हैं तो आपको दो से तीन दिन तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है। लेकिन अगर आप लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी के जरिए सर्जरी कराते हैं तो एक दिन बाद आपको हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

अपेन्डेक्टमी के साइड इफेक्ट्स — Side Effects of Appendectomy in Hindi

सर्जरी के बाद रोगी को कुछ खास साइड इफेक्ट्स नजर आ सकते हैं।

  • कट वाली जगह के आसपास लालिमा, सूजन या जलन होना
  • बुखार होना
  • भूख में कमी होना
  • उलटी होना
  • पेट दर्द होना
  • दस्त या कब्ज की समस्या होना

अगर आपको खुद में ये साइड इफेक्ट्स नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

लैप्रोस्कोपिक और ओपन अपेन्डेक्टमी में कौन है बेहतर — Which is Better: Laparoscopic or Open Appendectomy in Hindi

ओपन अपेन्डेक्टमी की तुलना में लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी से कई गुना बेहतर है। इसमें आपके पेट में छोटा सा कट लगाया जाता है जिसकी वजह से आपकी रिकवरी बहुत तेजी से हो जाती है। लेकिन ओपन अपेन्डेक्टमी के बाद रिकवरी में बहुत समय लगता है  अगर आप लैपरोस्कोपिक सर्जरी की मदद से अपेंडिसाइटिस का परमानेंट इलाज करवाना चाहते हैं तो Pristyn Care आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

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