मोतियाबिंद की सर्जरी कराने से पहले हर मरीज के मन में एक बार यह सवाल अवश्य उठता है की सर्जरी के बाद उन्हें कौन से लेंस का चुनाव करना चाहिए, किस प्रकार का लेंस उनके लिए सबसे बेस्ट होगा। मेडिकल साइंस के क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है और इलाज के माध्यम उन्नत हो रहे हैं। मोतियाबिंद का इलाज भी पहले की तुलना में अब अधिक सूक्ष्म, सरल, और सफल हो गया है। बाजार में कई तरह के लेंस मौजूद हैं, आप अपने मुताबिक एक बेहतर लेंस का चुनाव कर सकते हैं।
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लेंस का चुनाव करने के लिए आप नेत्र रोग विशेषज्ञ की सहायता भी ले सकता है। मोतियाबिंद सर्जरी के बाद लेंस का चुनाव करने से पहले कुछ खास बिंदुओं पर ध्यान देना होता है, जिसके बारे में हम नीचे विस्तार से बताने वाले हैं। लेंस का चुनाव करने से पहले आपको मोतियाबिंद और उसकी सर्जरी के प्रकार के बारे में जानना आवश्यक है। क्योंकि आपके लिए कौन सा लेंस बेस्ट है यह काफी हद तक मोतियाबिंद के प्रकार, गंभीरता और इलाज के माध्यम पर भी निर्भर करता है।
मोतियाबिंद क्या है
मोतियाबिंद आंखों में होने वाली एक बीमारी है, जिसके कारण लेंस में धुंधलापन छा जाता है। लेंस में धुंधलापन होने के कारण किसी भी वस्तु का प्रतिबिंब पूर्ण रूप से लेंस से होते हुए रेटिना तक नहीं जा पाता है, जिसकी वजह से रेटिना उस वस्तु की साफ चित्र को ऑप्टिक नर्व तक नहीं ले जा पाता है और रिजल्ट के तौर पर मरीज को चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। आमतौर पर मोतियाबिंद की समस्या आंखों में प्रोटीन के गुच्छे बनने के कारण होती है। यह समस्या एक खास उम्र यानी 50 साल की आयु के बाद होती है। लेकिन आंखों में चोट लगने के कारण मोतियाबिंद किसी को कभी भी हो सकता है।
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मोतियाबिंद की सर्जरी
मोतियाबिंद का इलाज दवा या आई ड्रॉप्स से संभव नहीं है। इसका एकमात्र इलाज सर्जरी ही है। सर्जरी की मदद से ही इस परेशानी को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। मोतियाबिंद की सर्जरी दो तरह से की जाती है, जिसमें पारंपरिक सर्जरी और फेम्टोसेकेंड लेजर असिस्टेड सर्जरी शामिल हैं। मोतियाबिंद की पारंपरिक सर्जरी को फेकोएमल्सिफिकेशन के नाम से भी जाना जाता है। दोनों ही सर्जरी की प्रक्रिया लगभग एक जैसी होती है। इन दोनों सर्जरी में फर्क बस इतना है की पारंपरिक मोतियाबिंद की सर्जरी के दौरान सर्जन कट लगाने के लिए ब्लेड का इस्तेमाल करते हैं और मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी के दौरान डॉक्टर लेजर का इस्तेमाल करते हैं।
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दोनों ही सर्जरीकल प्रक्रियाओं के दौरान लगाए कट बहुत ही छोटे होते हैं, इसलिए टांकों की जरूरत नहीं पड़ती है। टांकों की जगह सर्जन कट को बंद करने के लिए सेल्फ-सीलिंग लिक्विड (Self-sealing Liquid) का इस्तेमाल करते हैं। आमतौर पर मोतियाबिंद का इलाज करने के लिए लेजर सर्जरी का इस्तेमाल बहुत ही खास स्थितियों में किया जाता है। जब किसी मरीज को मोतियाबिंद के साथ साथ एस्टिग्मेटिज्म की भी समस्या होती है तो डॉक्टर लेजर सर्जरी से इलाज करने का सुझाव देते हैं। क्योंकि लेजर सर्जरी से मोतियाबिंद का इलाज करते समय डॉक्टर मरीज के एस्टिग्मेटिज्म की समस्या को भी ठीक कर देते हैं।
मोतियाबिंद सर्जरी के बाद सबसे अच्छे लेंस का चयन
आमतौर पर मोतियाबिंद सर्जरी के बाद इंट्राऑकुलर लेंस का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक आर्टिफिशियल लेंस है जो मरीज की आंखों को पराबैंगनी किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता है तथा आंख को जल्द से जल्द तेज और साफ दृष्टि पाने में मदद करता है। इंट्राऑकुलर लेंस के ढेरों प्रकार होते हैं और मरीज की आवश्यकता अनुसार इनमें से एक लेंस का चयन किया किया जाता है। इंट्राऑकुलर लेंस निम्नलिखित प्रकार के होते हैं।
मोनोफोकल इंट्राऑकुलर लेंस — मोतियाबिंद सर्जरी के बाद इस्तेमाल किए जाने वाला सबसे सामान्य प्रकार का लेंस है जो एक खास दूरी के लिए आपकी दृष्टि को रिस्टोर करता है। ज्यादातर लोग इस लेंस को डिस्टेंस विजन पर सेट करना पसंद करते हैं ताकि यात्रा या ड्राइविंग करते समय दूर की चीजें साफ साफ दिखाई दे सकें। इस लेंस का इस्तेमाल करने वाले लोगों को नजदीक की चीजों को देखने के लिए चश्मे का इस्तेमाल करना पड़ता है।
मल्टीफोकल इंट्राऑकुलर लेंस — जो लोग चश्मा नहीं पहनना चाहते हैं उनके लिए मल्टीफोकल इंट्राऑकुलर लेंस सबसे बेहतरीन विकल्प है। क्योंकि यह पास और दूर दोनों ही जगह की चीजों को साफ साफ देखने में मदद करता है। मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद इस लेंस का चुनाव करने के बाद आप बेहद ही साफ और तेज दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं जो आपके जीवन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इस लेंस में कई तरह के फोकी शामिल होते हैं जिसके कारण दिमाग खुद ब खुद एडजस्ट करना सिख जाता है। जिन लोगों को आंख में किसी प्रकार की कोई दूसरी बीमारी नहीं है वे अपने मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद इस लेंस का चुनाव कर सकते हैं।
टोरिक इंट्राऑकुलर लेंस — जो लोग मोतियाबिंद के साथ साथ एस्टिग्मेटिज्म से पीड़ित होते हैं या कॉर्निया में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है, उनके लिए मोनोफोकल या मल्टीफोकल लेंस का इस्तेमाल संभव और सुरक्षित नहीं है। इसलिए इस स्थिति में टोरिक इंट्राऑकुलर लेंस का चुनाव किया जाता है। यह लेंस आंख की रिफ्रैक्टिव गड़बड़ी को ठीक कर मरीज को तेज और साफ दृष्टि प्रदान करता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करने के बाद आप इस बात का पता लगा सकते हैं की आपकी समस्या को समाधान करने के लिए टोरिक इंट्राऑकुलर लेंस एक बेहतर विकल्प है या नहीं।
हर लेंस की अपनी खासियत और खामियां होती हैं। आपको कौन से लेंस की जरूरत है, या आपके लिए सबसे बेहतरीन लेंस कौन सा होगा यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है की आपकी लाइफस्टाइल क्या है, आप कौन सा काम करते हैं और आपको कैसी दृष्टि चाहिए। कई बार मरीज को लेंस की सही जानकारी नहीं होती है, ऐसे में उन्हें अपने डॉक्टर से इस बारे में विस्तार से बात करनी चाहिए। ताकि मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद मरीज को बिल्कुल वैसा ही रिजल्ट मिले जैसा वो चाहते थे।
अगर आप मोतियाबिंद का सबसे बेहतरीन इलाज पाना चाहते हैं तो अपने शहर में प्रिस्टीन केयर से संपर्क कर सकते हैं। हमारे पास देश के सबसे बेहतरीन आंख के सर्जन हैं, जो मोतियाबिंद की समस्या को मात्र कुछ मिनटों में ही हमेशा के लिए ठीक कर सकते हैं।