Uterine fibroid

फाइब्रॉइड (Fibroid) या रसौली गर्भाशय (Uterus) की मांसपेशियों में होने वाला ट्यूमर हैं। यूटेरस की मांसपेशियों में एक या एक से अधिक गांठ बन जाने पर रसौली की समस्या होती है। इसे मायोमा और लेयोमायोमा (Myoma and Leiomyoma) के नाम से भी जाना जाता है। इनका आकार अनार के दानों से लेकर अंगूर के बराबर होता है। हालांकि इनसे कैंसर का खतरा नहीं होता है। ध्यान न रखा जाए तो इनका आकार अंगूर से भी बड़ा हो सकता है। बढ़ते आकार के साथ-साथ दर्द भी बढ़ता जाता है। रसौली की वजह से पेट में दर्द और पीरियड्स में असामान्य ब्लीडिंग देखने को मिल सकती है। जरूरी नहीं कि हमेशा ही रसौली के लक्षण दिखें। इनके पनपने का कारण पता लगाना मुश्किल है। 

वैसे तो रसौली ज्यादा उम्र की महिलाओं में होती हैं लेकिन आजकल टीनएजर्स में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। रसौली के होने का मुख्य कारण एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन माना जाता है। एस्ट्रोजन शरीर में कम होते ही रसौली सिकुड़ने लगते हैं। यूटेरस में एक बार रसौली होने पर यह मेनोपॉज के बाद भी रहती है। जिन्हें ज्यादा मोटापा है, उन्हें रसौली होने की संभावना ज्यादा होती हैं।

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गर्भावस्था और रसौली — Pregnancy and Fibroid in Hindi

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) ने अपनी रिसर्च में इस बात की पुष्टि की है की भारत में 100 में से 25 महिलाऐं डिलीवरी के वक्त रसौली से पीड़ित होती हैं। गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं छोटे रसौली से ग्रसित होती हैं, इनकी संख्या का अनुमान लगा पाना मुश्किल है। बहुत से मामलों में गर्भ न ठहरने के लिए रसौली जिम्मेदार होते हैं। रसौली के कारण गर्भपात होने का अधिक खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में महिला तभी गर्भधारण कर सकती है जब रसौली निकाल दिया जाता है।

गर्भाशय में रसौली (फाइब्रॉइड) के प्रकार — Types of Uterine Fibroid in Hindi

यूटेरस में रसौली कि जगह से इसका प्रकार तय किया जाता है

सबसेरोसल फाइब्रॉइड — Subserosal Fibroid in Hindi

ये फाइब्रॉइड यूटेरस की दीवार के बाहर मौजूद होते हैं। इन फाइब्रॉइड के होने पर मासिक धर्म में अनियमितता, पेट में दर्द और रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत होती है।

सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड — Submucosal Fibroid in Hindi

ये फाइब्रॉइड गर्भाशय की निचली सतह में होते हैं और बाद में फैल जाते हैं। इनकी वजह से पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होती है।

सर्वाइकल फाइब्रॉइड — Cervical Fibroid in Hindi

ये फाइब्रॉइड यूटेरस के सबसे ऊपरी सतह में होते हैं। ये असामान्य पीरियड्स और अधिक ब्लीडिंग का कारण बनते हैं। 

इंट्राम्यूरल फाइब्रॉइड — Intramural Fibroid in Hindi

इस तरह के फाइब्रॉइड गर्भाशय के सतह में बनते हैं और यूट्रीन कैविटी (Uterine Cavity) के बाहर की ओर फैल जाते हैं। जब तक इनका आकार छोटा होता है, तब तक इनके लक्षण नजर नहीं आते हैं। बड़े आकार के हो जाने पर यह श्रोणि और रेक्टम में दर्द का कारण बनते हैं।

पेडनक्युलेट फाइब्रॉइड — Pedunculated Fibroid in Hindi

यह यूटेरस के बाहर होते हैं लेकिन इनका कुछ हिस्सा गर्भाशय से जुड़ा रहता है। इसका सीधा असर रीढ़ की हड्डियों पर पड़ता है जिसके कारण तेज दर्द की शिकायत होती है। 

गर्भाशय में रसौली के कारण — Causes of Uterine Fibroid in Hindi

गर्भाशय में रसौली के सही कारण का अभी तक पता नहीं लग पाया हैं। नीचे बताए गए कुछ कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से रसौली की समस्या होती है। 

हार्मोन 

एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) (ऐसे हार्मोन जो प्रेग्नेंसी के लिए जरूरी हैं) के कारण भी रसौली की समस्या हो सकती है। रसौली एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को अवशोषित करते हैं जिससे इनका आकार बढ़ जाता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन कम मात्रा में बचते हैं। तब रसौली के आकार में भी कमी आती है और ये खत्म हो सकते हैं। मेनोपॉज के बाद यूटेरस का आकार सामान्य हो जाता है जिससे रसौली भी सामान्य हो जाते हैं। 

अनुवांशिकी

रसौली की समस्या आनुवंशिक है यानी घर में पहले किसी महिला को रसौली रहा है तो यह आपको भी हो सकता है। 

अन्य कारण

गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन, कम उम्र से ही पीरियड्स आ जाना, शरीर में विटामिन डी की कमी होना, वजन ज्यादा होना, मांस का अधिक सेवन और शराब का सेवन करने से भी रसौली का निर्माण हो सकता है।

गर्भाशय में रसौली के लक्षण — Symptoms of Uterine Fibroid in Hindi

ज्यादातर रसौली के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। असामान्य तरीके से ब्लीडिंग होने पर फाइब्रॉइड होने का अंदाजा लगाया जाता है। अगर गांठ का निर्माण Uterine Line के आसपास होता है तो यूट्रीन में रक्त संचार बिगड़ जाता है। नतीजतन मरीज को ज्यादा दर्द झेलना पड़ता है। रसौली की वजह से कभी कभी काफी ज्यादा मात्रा में ब्लीडिंग होती है। ऐसा होने की वजह से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है और महिला कमजोरी, चिड़चिड़ापन और थकान महसूस करने लगती है। 

रसौली के लक्षण उनके आकार पर निर्भर करते हैं। फाइब्रॉइड का आकार बड़ा होने पर निम्नलिखित लक्षण नजर आते हैं।

  • पेल्विक क्षेत्र में दर्द
  • मूत्राशय यानी ब्लेडर में दबाव होना। कभी कभी पेशाब ज्यादा दबाव के साथ बाहर निकलना। पेशाब निकालते समय रुकावट होना।
  • मल त्याग करते वक्त तेज दर्द होना। 

गर्भाशय में रसौली की जांच — Diagnosis of Uterine Fibroid in Hindi

आमतौर पर रसौली के कुछ खास लक्षण नजर नहीं आते हैं। जो लक्षण नजर आते हैं, वे कई बीमारियों में नजर आने वाले सामान्य लक्षण हैं। ऐसे में कुछ टेस्ट करवाने के बाद ही रसौली का पता लगाया जा सकता है।

अल्ट्रासाउंड टेस्ट  (Ultrasound)

अल्ट्रासाउंड की मदद से रसौली का पता लगाया जा सकता है। सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड (Submucosal Fibroid) का पता अल्ट्रासाउंड से लगता है। इसके अलावा ऐसे रसौली जो गर्भाशय ग्रीवा (Uterine Cervix) में मौजूद होते हैं, उनका पता भी अल्ट्रासाउंड से लगाया जा सकता है। 

एमआरआई स्कैन (MRI)

एमआरआई स्कैन के माध्यम से रसौली के आकार और इसकी मात्रा का पता लगाया जा सकता है।

डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी (diagnostic Laparoscopy)

इस प्रक्रिया के दौरान पेट में एक पतली और लचीली ट्यूब डाली जाती है, जिससे गर्भाशय के बाहर मौजूद रसौली का टेस्ट होता है। स्थिति के अनुसार डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी के बाद बॉयोप्सी भी कराई जा सकती है। बॉयोप्सी केवल डॉक्टर के कहने पर ही करानी चाहिए।

हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy)

यह प्रक्रिया लेप्रोस्कोपी टेस्ट से मिलती जुलती है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय में एक लचीली ट्यूब डाली जाती है, जिसमें कैमरा लगा होता है। यह कैमरा गर्भाशय में फाइब्रॉइड का पता लगाता है। जरूरत होने पर हिस्टेरोस्कोपी के बाद बॉयोप्सी की जाती है। 

गर्भाशय में रसौली का इलाज – Treatment of Uterine Fibroid in Hindi

रसौली का इलाज निम्न तरीकों से किया जा सकता है:

गोनेडोटरोपिन रिलीजिंग हॉरमोन एगोनिस्ट — Gonadotropin Releasing Hormone Agonist (GNRHA)

जीएनआरएचए (GNRHA) एक प्रकार का इलाज है जो सेक्स हार्मोन को प्रभावित करता है। इससे एस्ट्रोजेन कम बनते हैं और रसौली से छुटकारा मिलता है। जीएनआरएचए से पीरियड्स प्रभावित होते हैं। यह मासिक धर्म चक्र को रोक सकता है। लेकिन इससे फर्टिलिटी पर गलत असर नहीं पड़ता है। रसौली की सर्जरी से पहले जीएनआरएचए के माध्यम से ही इलाज किया जाता है। इलाज के बाद अधिक पसीना और  योनि में सूखापन आने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। जीएनआरएचए के जरिये बड़े आकार की रसौली का इलाज नहीं होता है। ये सिर्फ छोटे आकार के फाइब्रॉइड में ही असरदायक है। कम से कम समय में फाइब्रॉइड से छुटकारा पाने के लिए यह एक अच्छा इलाज हो सकता है। 

गर्भनिरोधक गोलियां — Contraceptive Pills

गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से भी रसौली से निपटा जा सकता है। यह गोलियां ओव्यूलेशन सायकल (Ovulation Cycle) को नियंत्रित करती हैं। कभी कभी फाइब्रॉइड पर इनका असर नहीं होता है। ऐसे में दूसरे तरीके से इलाज करना पड़ता है।

लेवोनोर्गेस्ट्रेल इंट्रायूटेरिन सिस्टम — Levonorgestrel Intrauterine System (IUS)

इलाज की इस प्रक्रिया के दौरान प्लास्टिक डिवाइस को गर्भाशय में डाला जाता है। लेवोनोर्गेस्ट्रेल एक तरह का प्रोजेस्टेरोन है जो इस डिवाइस से बनने लगता है। जिसकी मदद से गर्भाशय में हो रहे बदलाव को तेजी से रोका जा सकता है। ऐसा करने से ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या भी दूर होती है। अगले 6 महीनों तक इसके साइड इफेक्ट्स जैसे मासिक धर्म चक्र में अनियमितता, हल्का सिर दर्द, स्तनों के आकार में बदलाव, चेहरे पर मुंहासे आना शामिल हैं। इससे पीरियड्स भी कुछ समय के लिए बंद हो सकते हैं। 

गर्भाशय में रसौली का सर्जरी से इलाज — Surgery For Uterine Fibroid in Hindi

मायोमेक्टोमी (Myomectomy)

गर्भाशय की दीवार से रसौली को मायोमेक्टोमी के जरिए निकाला जाता है। यह सर्जरी सिर्फ छोटे आकार के रसौली को निकालती है। अगर रसौली का आकार बड़ा है या फिर गर्भाशय की दीवार के अलावा कहीं और स्थित है तो फाइब्रॉइड को मायोमेक्टोमी से निकालना संभव नहीं है।

एंडोमेट्रियल एब्लेशन (Endometrial Ablation)

गर्भाशय के अंदर मौजूद रसौली का इलाज एंडोमैट्रीयल एब्लेशन के जरिये किया जा सकता है।

हिस्टेरेक्टोमी (Hysterectomy)

अधिक ब्लीडिंग या फिर रसौली का आकार बड़ा होने की स्थिति में इस सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है। इस सर्जरी से फाइब्रॉइड को गर्भाशय से निकाल दिया जाता है।

गर्भाशय में रसौली से अन्य परेशानियां हो सकती हैं Uterine Fibroid May Cause Other Problems in Hindi

लियोम्योसार्कोमा (Leiomyosarcoma)

लियोम्योसार्कोमा एक प्रकार का कैंसर है जो रसौली के कारण हो सकता है। समय पर इसका सही इलाज करवाना आवश्यक है।

बांझपन (Infertility)

रसौली जब यूटेरस के बाहरी ओर होते हैं तो उत्सर्जित (Ovulated) अंडा यूटेरस तक नहीं पहुंच पाता है। इस वजह से गर्भधारण में  मुश्किलें आती है। फाइब्रॉइड गर्भाशय के आकार को भी बदल देता है जिससे गर्भधारण नहीं हो पाता है। (आगे पढ़े: महिलाओं और पुरुषों में फर्टिलिटी बढ़ाने के आसान प्राकृतिक एवं घरेलू उपाय )

एमेनोरिया  (Amenorrhea)

गर्भाशय की रसौली एमेनोरिया का कारण बन सकती है। एमेनोरिया में पीरियड्स के दौरान खून के थक्के बनने लगते हैं या फिर ज्यादा ब्लीडिंग होती है। यह ब्लीडिंग सात से अधिक दिन तक हो सकती है।

पेट में सूजन (Stomach Swelling)

रसौली का आकार बड़ा होने पर पेट के निचले हिस्से में सूजन की समस्या हो सकती है। सूजन की वजह से मल त्याग के दौरान तेज पेट दर्द की शिकायत हो सकती है।

गर्भाशय में रसौली का घरेलू इलाज — Home Remedies For Uterine Fibroid in Hindi

हल्दी

रसौली में हल्दी का सेवन करना चाहिए क्योंकि यह खतरनाक तत्वों को शरीर से बाहर निकाता है जिसकी मदद से फाइब्रॉइड के बढ़ते आकार को रोक जा सकता है। 

सेब का सिरका

रोजाना सुबह गुनगुने पानी के साथ सेब के सिरके का सेवन करें। नियमित रूप से इसका सेवन करने से रसौली की समस्या दूर होती है। सेब के सिरके का सेवन पेट में सूजन और दर्द से भी छुटकारा दिलाता है।

लहसुन

खाली पेट सुबह के समय रोजाना एक कली लहसुन का सेवन करने से गर्भाशय की रसौली से छुटकारा मिलता है। नियमित रूप से 2 महीने तक लहसुन का सेवन करना चाहिए।

आंवला और शहद

एक चम्मच आंवला का पाउडर और एक चम्मच शहद का मिश्रण बनाएं। एक महीने तक इस मिश्रण का रोजाना सेवन करने से रसौली की समस्या खत्म हो सकती है। 

गाय का दूध

गाय के दूध को गर्म करने के बाद उसमें एक चम्मच धनिया पाउडर और एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं और फिर उसका सेवन करें। ऐसा करने से रसौली में आराम मिलता है। 

निष्कर्ष 

रसौली घातक नहीं होते हैं लेकिन यह दूसरी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। इसलिए इलाज करवाना जरूरी है। अगर आपको इनके लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर इसकी जांच और इलाज के बारे में बात करनी चाहिए।

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