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टाइट कपड़ा और खासकर अंडरवियर पहनने की वजह से पुरुष तथा महिला दोनों को प्राइवेट पार्ट्स से संबंधित ढेरों समस्याओं का सामना करना पड़ता है। टाइट अंडरवियर पहनने के कारण प्राइवेट पार्ट में हवा नहीं लगता है तथा प्रेशर की वजह से बैठते या उठते समय वहां के बाल या तो दब कर स्किन के अंदर चले जाते हैं या फिर टूट जाते हैं। बाल टूटने के कारण वहां पर फोड़ा हो जाता है तथा बाल स्किन के अंदर जाने पर बाल के साथ साथ स्किन के अंदर कचरा भी चला जाता है जिसके कारण कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं, इन्ही में से एक समस्या पायलोनिडल साइनस है। इस ब्लॉग में हम आपको इस समस्या से संबंधित आवश्यक बातों के बारे में बता रहे हैं जिसकी जानकारी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। 

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पायलोनिडल साइनस क्या है — What is Pilonidal Sinus in Hindi — Pilonidal Sinus in Hindi Pilonidal Sinus Kya Hai

पायलोनिडल साइनस स्किन में छोटा सा एक छेद है जो मवाद से भरा हुआ होता है। कभी कभी इसमें थोड़ी मात्रा में खून भी हो सकता है। यह आमतौर पर कूल्हे के ऊपर या पीठ के निचले हिस्से में होता है। पायलोनिडल साइनस सिस्ट का रूप है जिसमें मवाद और खून के अलावा बाल और गंदगी भी भर जाते हैं। जिसके कारण मरीज को काफी तेज दर्द हो सकता है। पायलोनिडल साइनस से खून एवं मवाद स्राव के साथ साथ बदबू भी आती है। आमतौर पर यह समस्या लंबे समय तक एक जगह बैठकर काम करने वाले लोगों को होता है जिसमें कैब ड्राइवर्स, शॉप कीपर्स या कॉर्पोरेट की दुनिया में काम करने वाले लोग शामिल हैं। 

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महिलाओं की तुलना में यह बीमारी पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है। जब शरीर पर मौजूद बाल शरीर के अंदर चले जाने तथा उसकी वजह से शरीर के अंदर गंदगी आने के कारण यह समस्या पैदा होती है। पिलोनोइड साइनस को सिस्ट या फोड़ा भी कहा जाता है। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है लेकिन समय पर इसका इलाज आवश्यक है। अगर आप इससे पीड़ित हैं तो डॉक्टर से मिलने के बाद दवा, क्रीम या सर्जरी की मदद से इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं।  

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पायलोनिडल साइनस क्यों होता है — What Are The Causes of Pilonidal Sinus in Hindi — Pilonidal Sinus Kyun Hota Hai

पायलोनिडल साइनस के कुछ खास कारण होते हैं। अगर आपको पहले ही इन सभी कारणों की सही जानकारी हो जाए तो आप कुछ चीजों पर ध्यान देने तथा कुछ सावधानियां बरतने के बाद खुद को इस पेशानी से दूर रख सकते हैं। किसी भी समस्या से बचने के लिए उसके कारणों को समझना आवश्यक है। क्योंकि इन्ही कि मदद से आप घरेलू नुस्खों या इलाज के किसी भी दूसरे माध्यम का इस्तेमाल कर अपनी बीमारी को ठीक करते हैं। 

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पायलोनिडल साइनस के कारणों में फोड़ा होना, जख्म होना, बाल तोड़ की समस्या होना, कोई अनुवांशिक कारण होना, शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होना, टाइट कपड़े पहनना और खासकर टाइट अंडरवियर पहनना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, पूरे शरीर में प्रणाली गत संक्रमण की शिकायत होना, सिस्ट के भीतर त्वचा के कैंसर की दुर्लभ संभावना होना, त्वचा को रगड़ने से हेयर फॉल एरिया का बंद हो जाना तथा बाल टूटना और टूटे हुए बाल का स्किन के अंदर चले जाना आदि शामिल हैं। अगर आपको पहले से ही इनमें से कोई भी समस्या है तो उसका समय पर सही उपचार करके पायलोनिडल साइनस की समस्या को पैदा होने से रोक सकते हैं। 

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पायलोनिडल साइनस के क्या लक्षण होते हैं — What Are The Symptoms of Pilonidal Sinus in Hindi — Pilonidal Sinus Ke Kya Lakshan Hote Hain

पायलोनिडल के कुछ खास लक्षण होते हैं जो इस बीमारी की ओर इशारा करते हैं। अगर आप इससे पीड़ित हैं तो आप खुद में कुछ लक्षणों को महसूस कर सकते हैं। लक्षणों को महसूस करने के बाद आप डॉक्टर के पास जाते हैं। डॉक्टर भी सबसे पहले इसके लक्षण को ही समझते हैं और फिर जांच करने के बाद इसकी पुष्टि करते हैं। हालांकि, पिलोनिडल साइनस बाहर से ही साफ दिखाई देता है इसलिए कई बार इसके जांच की जरूरत भी नहीं पड़ती है। लेकिन डॉक्टर इसकी गंभीरता को जानने के लिए इसकी जांच अवश्य करते हैं।  

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इसके लक्षणों में बुखार लगना, पायलोनिडल साइनस से स्राव होना, स्राव खून, मवाद या दोनों हो सकता है, स्राव के साथ कभी कभी बदबू आना, पायलोनिडल साइनस के आस पास की स्किन में लालिमा छाना, स्किन के छेद से हल्का खून निकलना, कूल्हे की दरार से हल्का ऊपर निशान बनना, टाइट कपड़ा पहनने पर परेशानी होना, उठने, बैठने या धक्का देने पर दर्द और परेशानी होना तथा कभी कभी उसमें खुजली होना भी शामिल है। अगर आप पायलोनिडल साइनस के लक्षणों को शुरूआती स्टेज में ही समझकर तुरंत एक्शन लें तो उसी समय इसकी रोकथाम की जा सकती है।            

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पायलोनिडल साइनस की सर्जरी — Laser Surgery of Pilonidal Surgery in Hindi — Pilonidal Sinus Ki Laser Surgery 

पायलोनिडल साइनस की लेजर सर्जरी करने से पहले डॉक्टर मरीज की शारीरिक जांच करते हैं। जांच के जरिए वे इस समस्या की गंभीरता का पता लगाते हैं। हालांकि, कई बार इसके जांच की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है क्योंकि पायलोनिडल साइनस शरीर के बाहर तथा स्किन के ऊपर होता है। इसलिए इसे देखकर ही डॉक्टर इसकी स्थिति का अंदाजा लगा लेते हैं। सर्जरी से पहले डॉक्टर मरीज की ट्रीटमेंट हिस्ट्री के बारे में भी पूछते हैं, सर्जरी से पहले आपको उन्हें अपने दूसरे चल रहे किसी भी प्रकार के मेडिकेशन, एलर्जी या अगर आपको पहले से कोई दूसरी बीमारी है तो इन सभी चीजों के बारे में अपने डॉक्टर को बताना चाहिए। ताकि आपकी सर्जरी के दौरान या उसके बाद आपको किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट्स या नुकसान होने का खतरा न के बराबर हो।

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इन सभी चीजों के बाद डॉक्टर सर्जरी की प्रक्रिया शुरू करते हैं। सबसे पहले वे मरीज को अनेस्थिसिया देते हैं और फिर पायलोनिडल साइनस को सर्जरी की मदद से काटकर शरीर से अलग कर देते हैं। लेजर सर्जरी द्वारा पायलोनिडल साइनस का इलाज करने पर आपको जरा भी दर्द, ब्लीडिंग या दूसरी परेशानीयों का सामना नहीं करना पड़ता है। सर्जरी वाले दिन ही आपको हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। सर्जरी के बाद जख्म या दाग बनने तथा इंफेक्शन होने का खतरा लगभग न के बराबर होता है और रिकवरी में आपको काफी कम समय लगता है। आमतौर पर, सर्जरी के 2-3 दिन के बाद आप अपने दैनिक जीवन के कामों को फिर से करने के लिए पूरी तरह से फिट हो जाते हैं।      

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लेजर सर्जरी के फायदे

  • संक्षिप्त लेजर सर्जरी।
  • तेज रिकवरी होती है।
  • आधे घंटे की प्रक्रिया है।
  • घाव और दाग नहीं बनते हैं।  
  • सूजन और दर्द नहीं होता है।
  • इंफेक्शन का खतरा नहीं होता है।
  • मरीज उसी दिन डिस्चार्ज हो जाता है।
  • सुरक्षित, सफल और प्रभावशाली इलाज है।
  • बीमारी दोबारा होने का खतरा खत्म हो जाता है। 
  • 48 घंटे के अंदर अपने दैनिक जीवन के कामों को शुरू कर सकते हैं। 

लेजर सर्जरी के जरिए आप अपने पायलोनिडल साइनस की समस्या से बहुत ही कम से समय में छुटकारा पा लेते हैं। इस सर्जरी के बाद आपको यह समस्या दोबारा होने का खतरा नहीं होता है। यह सर्जरी मात्र 20-30 मिनट के अंदर पूरी हो जाती है। 

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पायलोनिडल साइनस की सर्जरी और इसके साइड इफेक्ट्स — Side Effects of Pilonidal Sinus Laser Surgery in Hindi — Pilonidal Sinus Ki Laser Surgery Ke Nuksan 

आमतौर पर, पायलोनिडल साइनस की लेजर सर्जरी के बाद मरीज को किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। क्योंकि इलाज का यह तरीका बहुत ही आधुनिक और सुरक्षित है। इलाज के दूसरे तरीकों की तुलना में यह एक बेहद ही सफल, शुक्ष्म और सुरक्षित प्रक्रिया है जो की लगभग आधे घंटे में पूरी हो जाती है। सर्जरी के बाद मरीज उसी दिन अपने घर जाने के लिए तैयार भी हो जाते हैं। लेकिन दूसरी सर्जरी की तरह इस सर्जरी के भी कुछ सामान्य और संभावित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं जो मरीज सर्जरी के बाद खुद में महसूस कर सकते हैं। 

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इसके साइड इफेक्ट्स में सर्जरी वाली जगह से ब्लीडिंग होना, वहां पर इंफेक्शन होना तथा घाव बन जाना आदि शामिल हैं। अगर आपको सर्जरी के बाद ऊपर बताई गई या दूसरी कोई भी समस्या हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलकर उन्हें इस बारे में बताना चाहिए ताकि वे समय पर ही इनकी रोकथाम कर सकें।            

प्रिस्टीन केयर में पायलोनिडल साइनस की लेजर सर्जरी — Pristyn Care is Best For Pilonidal Sinus Laser Surgery in Hindi  

अगर आपको पायलोनिडल साइनस है तो आप प्रिस्टीन केयर से संपर्क कर सकते हैं। इनके पास देश के सबसे बेहतरीन सर्जन मौजूद हैं जिन्हे लेजर सर्जरी में महारत हासिल है। ये आपकी प्रॉब्लम को मात्र कुछ ही मिनटों में मॉडर्न मेडिकल इंस्ट्रूमेंट और अपने अनुभव की मदद से हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं। पायलोनिडल साइनस का बेस्ट इलाज करने के अलावा, प्रिस्टीन केयर पायलोनिडल साइनस की सर्जरी वाले दिन अपने मरीज को कैब फैसिलिटी देते हैं जो सर्जरी के दिन उन्हें घर से हॉस्पिटल और सर्जरी के बाद हॉस्पिटल से घर वापस छोड़ती है।

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मरीज के हॉस्पिटल पहुंचने से पहले उनके लिए प्रिस्टीन टीम की तरफ से एक केयर बड्डी मौजूद रहता है जो इलाज से जुड़े सभी पेपरवर्क को पूरा करता है। साथ ही इलाज के बाद जब तक मरीज हॉस्पिटल में रूकते हैं, केयर बड्डी उनकी देखरेख और सभी जरूरी चीजों का ख्याल रखता है। दूसरे प्राइवेट हॉस्पिटल की तुलना में प्रिस्टीन केयर में पायलोनिडल साइनस का लेजर सर्जरी द्वारा इलाज बहुत कम खर्चे में किया जाता है। 

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साथ ही साथ यहां जीरो ईएमआई की सुविधा भी उपलब्ध है। प्रिस्टीन केयर सभी डायग्नोस्टिक टेस्ट पर 30% तक की छूट, गोपनीय परामर्श, डीलक्स रूम की सुविधा और सर्जरी के बाद फ्री फॉलो-अप्स की सुविधा भी देते हैं। साथ ही आप 100% इंश्योरेंस भी क्लेम कर सकते हैं। अगर आप पायलोनिडल साइनस का इलाज लेजर सर्जरी के जरिए कराना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर आपके लिए बेस्ट विकल्प हो सकता है। 

निष्कर्ष — Conclusion

पायलोनिडल साइनस कोई बहुत गंभीर बीमारी नहीं है जिससे आपको डरने या घबराने की जरूरत है। यह एक बहुत छोटी सी समस्या है। लेकिन इसपर ध्यान देना तथा समय पर इसका सही इलाज कराना आवश्यक है। लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने पर इसका इंफेक्शन फैल सकता है जिसके कारण आपको दूसरी और कई गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसका इलाज दवा और मरहम के जरिए भी किया जा सकता है। लेकिन उसके बाद यह बीमारी फिर से दोबारा भी हो सकती है। यही कारण है कि लोग इसका इलाज करने के लिए लेजर सर्जरी का चुनाव करते हैं। लेजर सर्जरी की मदद से पायलोनिडल साइनस को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। अगर आपको भी पायलोनिडल साइनस है तो डॉक्टर से परामर्श करने के बाद आप लेजर सर्जरी की मदद से इसका परमानेंट इलाज करवा सकते हैं।            

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