प्रेगनेंसी के छठवें हफ्ते में गर्भपात (6 सप्ताह का गर्भपात) गर्भावस्था को शुरुआती चरण में सुरक्षित तरीके से समाप्त करने की प्रक्रिया है। इस समय भ्रूण का विकास प्रारंभिक अवस्था में होता है, इसलिए मेडिकल गर्भपात और सर्जिकल गर्भपात दोनों विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। अधिकतर महिलाएं इसी समय अपनी प्रेगनेंसी कन्फर्म करती हैं और फिर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेती हैं। सही समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सुरक्षित और जटिलता-रहित प्रक्रिया के लिए जरूरी माना जाता है।
प्रेगनेंसी के छठवें हफ्ते में गर्भपात (6 सप्ताह का गर्भपात) गर्भावस्था को शुरुआती चरण में सुरक्षित तरीके से समाप्त करने की प्रक्रिया है। ... और पढ़ें

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छठे हफ्ते में गर्भपात करवाने के कई व्यक्तिगत, स्वास्थ्य और सामाजिक कारण हो सकते हैं।
कई बार गर्भनिरोधक असफल होने या परिवार नियोजन न होने के कारण महिला गर्भवती हो जाती है और गर्भपात का निर्णय लेती है।
यदि महिला को गंभीर बीमारी, हाई रिस्क प्रेगनेंसी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हों, तो डॉक्टर गर्भावस्था समाप्त करने की सलाह दे सकते हैं।
कुछ मामलों में भ्रूण के विकास में समस्या या जन्मजात विकार का जोखिम होने पर गर्भपात करवाया जा सकता है।
कई महिलाओं के लिए मानसिक रूप से गर्भावस्था को स्वीकार करना कठिन हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह और काउंसलिंग मददगार होती है।
आर्थिक स्थिति, पारिवारिक दबाव या सामाजिक परिस्थितियों के कारण भी महिलाएं गर्भपात का विकल्प चुन सकती हैं।
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अल्ट्रासाउंड से यह पता लगाया जाता है कि गर्भाशय के अंदर प्रेगनेंसी है या नहीं और गर्भावस्था कितने सप्ताह की है।
एचसीजी हार्मोन, हीमोग्लोबिन और संक्रमण जैसी स्थितियों की जांच की जाती है।
प्रेगनेंसी की पुष्टि और सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए यूरीन टेस्ट किया जाता है।
यदि किसी प्रकार का इंफेक्शन हो तो पहले उसका इलाज किया जाता है ताकि प्रक्रिया सुरक्षित रहे।
6 सप्ताह की प्रेगनेंसी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका मेडिकल अबॉर्शन है। इसमें डॉक्टर की सलाह से दवाइयों का उपयोग किया जाता है।
यह दवा भ्रूण के विकास को रोकती है।
यह दवा गर्भाशय में संकुचन पैदा करके गर्भ को बाहर निकालने में मदद करती है।
मेडिकल गर्भपात के दौरान रक्तस्राव और पेट में दर्द होना सामान्य माना जाता है, लेकिन दवाइयां केवल डॉक्टर की निगरानी में ही लेनी चाहिए।
यदि मेडिकल अबॉर्शन सफल न हो या महिला की स्थिति उसके लिए उपयुक्त न हो, तो डॉक्टर सर्जिकल गर्भपात की सलाह दे सकते हैं।
यह शुरुआती गर्भावस्था में की जाने वाली सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें सक्शन की मदद से गर्भ को हटाया जाता है।
गर्भपात के दौरान या बाद में कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
यदि अत्यधिक रक्तस्राव, तेज बुखार या असहनीय दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
भोजन और जीवनशैली से जुड़े सुझाव
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शरीर को रिकवरी के लिए समय देना जरूरी है।
कुछ दिनों तक भारी काम और एक्सरसाइज न करें।
आयरन, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर भोजन जल्दी रिकवरी में मदद करता है।
संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें।
दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन डॉक्टर के निर्देश अनुसार करें।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
यदि गर्भपात योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ की निगरानी में किया जाए, तो यह सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है। असुरक्षित तरीके अपनाने से संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव और भविष्य की प्रजनन समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
अधिकतर मामलों में सुरक्षित गर्भपात के बाद महिला भविष्य में सामान्य रूप से गर्भधारण कर सकती है। गर्भपात का सीधा संबंध बांझपन से नहीं माना जाता, लेकिन संक्रमण या जटिलताओं के मामलों में जोखिम बढ़ सकता है।
6 सप्ताह की प्रेगनेंसी में गर्भपात का खर्च कई बातों पर निर्भर करता है:
शुरुआती मेडिकल गर्भपात का खर्च सामान्यतः कम होता है, जबकि सर्जिकल प्रक्रिया का खर्च अधिक हो सकता है।
नहीं, सुरक्षित और डॉक्टर की देखरेख में किया गया गर्भपात आमतौर पर fertility को प्रभावित नहीं करता।
ज्यादातर महिलाएं बाद में सामान्य रूप से गर्भधारण कर सकती हैं।
जोखिम केवल तब होता है जब गर्भपात असुरक्षित तरीके से, बिना डॉक्टर के, या इंफेक्शन/जटिलता के साथ किया जाए।
गर्भपात के बाद 2–3 हफ्तों में ovulation शुरू हो सकता है, यानी जल्दी दोबारा प्रेगनेंसी संभव है।
हमेशा अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट वाले सेंटर का चयन करें।
मरीज की जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए।
अस्पताल में साफ-सफाई और इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है।
गर्भपात के बाद नियमित जांच और सहायता उपलब्ध होनी चाहिए।
भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) एक्ट के तहत निर्धारित शर्तों में गर्भपात कानूनी है। गर्भपात केवल पंजीकृत और योग्य डॉक्टर द्वारा ही किया जाना चाहिए।
अधिकतर महिलाएं कुछ दिनों में सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। हालांकि, शरीर को पूरी तरह रिकवर होने में 1-2 सप्ताह तक का समय लग सकता है।
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मेडिकल गर्भपात की प्रक्रिया आमतौर पर 1-2 दिनों में शुरू हो जाती है, लेकिन पूरी रिकवरी में कुछ दिन लग सकते हैं।
हाँ, शुरुआती गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह से दवाइयों द्वारा गर्भपात किया जा सकता है।
योग्य डॉक्टर की निगरानी में कराया गया गर्भपात सुरक्षित माना जाता है।
महिला शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होने के बाद भविष्य में दोबारा गर्भधारण कर सकती है।
हल्की से मध्यम ब्लीडिंग कुछ दिनों से लेकर 1-2 सप्ताह तक हो सकती है।
जब मेडिकल गर्भपात संभव न हो या दवाइयों से गर्भपात सफल न हो, तब सर्जिकल प्रक्रिया की जा सकती है।
Supriya, 27 Yrs
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