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प्रेगनेंसी के छठवें हफ्ते में गर्भपात, 6 सप्ताह का गर्भपात

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    Dr. Rahul Manchanda - A gynaecologist for Abortion

    Dr. Rahul Manchanda

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    Dr. R Swetha Sree - A gynaecologist for Abortion

    Dr. R Swetha Sree

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6 सप्ताह के गर्भावस्था का गर्भपात - Week 6 Abortion in Hindi

गर्भावस्था के 6 सप्ताह में गर्भपात करना एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय हो सकता है। इस समय भ्रूण का विकास प्रारंभिक अवस्था में होता है, और ज्यादातर महिलाएं गर्भावस्था की पुष्टि इसी समय करती हैं। 6 सप्ताह की गर्भावस्था में गर्भपात मुख्य रूप से मेडिकल और सर्जिकल गर्भपात के माध्यम से किया जा सकता है। यह वह समय है जब महिला को गर्भपात के विकल्पों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए ताकि सही निर्णय लिया जा सके।

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6 सप्ताह की गर्भावस्था के कारण

6 सप्ताह की गर्भावस्था में गर्भपात के कई कारण हो सकते हैं। कुछ महिलाएं गर्भावस्था जारी रखने में सक्षम नहीं होतीं, जबकि कुछ अन्य परिस्थितियों के कारण गर्भपात करवाने का निर्णय लेती हैं। यहां कुछ मुख्य कारण दिए जा रहे हैं:

  1. अनचाहा गर्भावस्था: कई बार महिलाएं परिवार नियोजन न कर पाने या किसी अन्य कारण से गर्भवती हो जाती हैं और गर्भपात का निर्णय लेती हैं।
  2. स्वास्थ्य समस्याएं: यदि महिला को किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ता है, तो डॉक्टर गर्भावस्था जारी रखने की सलाह नहीं करते।
  3. भ्रूण में असामान्यताएं: अगर डॉक्टर भ्रूण में कोई असामान्यता पाते हैं जो जन्मजात समस्याएं उत्पन्न कर सकती है, तो गर्भपात की सलाह दी जा सकती है।
  4. आर्थिक और सामाजिक कारण: कुछ महिलाएं आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण इस समय संतान को जन्म देने में सक्षम नहीं होतीं और गर्भपात का निर्णय लेती हैं।
  5. मानसिक और भावनात्मक कारण: मानसिक रूप से गर्भावस्था को स्वीकार न कर पाने की स्थिति में भी महिलाएं गर्भपात का निर्णय ले सकती हैं।

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6 सप्ताह के प्रेगनेंसी के अबॉर्शन से पहले की जाने वाली जांच

गर्भपात से पहले कुछ आवश्यक जांच की जाती हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिला का स्वास्थ्य गर्भपात प्रक्रिया के लिए उपयुक्त है। इन जांचों में निम्नलिखित शामिल होती हैं:

  1. अल्ट्रासाउंड जांच: अल्ट्रासाउंड से गर्भावस्था की पुष्टि की जाती है और यह देखा जाता है कि भ्रूण गर्भाशय के अंदर स्थित है या नहीं। साथ ही, इससे गर्भावस्था की सही उम्र का पता चलता है।
  2. रक्त परीक्षण: महिला के शरीर में एचसीजी हार्मोन का स्तर मापा जाता है, जो गर्भावस्था की पुष्टि करता है। इसके अलावा, एनीमिया या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच के लिए भी रक्त परीक्षण किया जाता है।
  3. यूरीन टेस्ट: यह गर्भावस्था की पुष्टि के लिए किया जाने वाला एक आम परीक्षण है।
  4. संक्रमण की जांच: किसी प्रकार का संक्रमण होने पर डॉक्टर पहले उसका उपचार कर सकते हैं ताकि गर्भपात प्रक्रिया सुरक्षित रहे।

6 सप्ताह की गर्भावस्था का गर्भपात कैसे होता है?

6 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान गर्भपात मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जा सकता है: मेडिकल गर्भपात और सर्जिकल गर्भपात। दोनों ही तरीके प्रभावी और सुरक्षित होते हैं, और इनका चयन महिला की शारीरिक स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

  1. मेडिकल गर्भपात: यह तरीका शुरुआती गर्भावस्था (7-9 सप्ताह तक) के लिए सबसे सामान्य है। इसमें गर्भाशय से भ्रूण को निकालने के लिए दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर दो दवाइयां दी जाती हैं:
    • मिफेप्रिस्टोन: यह गर्भाशय में भ्रूण के विकास को रोकता है। इसे डॉक्टर की देखरेख में लिया जाता है।
    • मिसोप्रोस्टोल: मिफेप्रिस्टोन के 24-48 घंटे बाद यह दवा दी जाती है, जो गर्भाशय में संकुचन पैदा करती है और भ्रूण को बाहर निकाल देती है।
  2. सर्जिकल गर्भपात: यदि मेडिकल गर्भपात किसी कारणवश उपयुक्त न हो या असफल हो, तो सर्जिकल गर्भपात किया जा सकता है। इसमें डॉक्टर गर्भाशय से भ्रूण को हटाने के लिए निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग करते हैं:
    • सक्शन या वैक्यूम एस्पिरेशन: यह प्रक्रिया 6 सप्ताह की गर्भावस्था के लिए प्रभावी होती है, जिसमें एक सक्शन डिवाइस का उपयोग किया जाता है ताकि भ्रूण को गर्भाशय से बाहर निकाला जा सके।

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6 सप्ताह के गर्भ के गर्भपात के लिए तैयारी कैसे करें?

गर्भपात से पहले कुछ आवश्यक तैयारियां करना जरूरी होता है ताकि प्रक्रिया सुरक्षित और प्रभावी हो। यहां कुछ प्रमुख बातें दी जा रही हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए:

  1. डॉक्टर से परामर्श: गर्भपात से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी होता है। डॉक्टर गर्भपात के विभिन्न तरीकों की जानकारी देंगे और यह तय करेंगे कि कौन सा तरीका आपके लिए सबसे उपयुक्त है।
  2. भावनात्मक तैयारी: गर्भपात का निर्णय लेना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए अपनी मानसिक स्थिति का ध्यान रखें।
  3. परिवार और दोस्तों का सहयोग: गर्भपात के बाद शारीरिक और मानसिक रूप से समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए परिवार और दोस्तों का सहयोग लेने में संकोच न करें।
  4. आवश्यक दवाइयों का उपयोग: डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का सही समय पर सेवन करें और प्रक्रिया के दौरान पूर्ण आराम करें।
  5. शारीरिक तैयारी: गर्भपात से पहले शरीर को स्वस्थ और तैयार रखें, जैसे कि संतुलित आहार लेना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना।

6 सप्ताह के गर्भपात के बाद की देखभाल (Abortion Aftercare)

गर्भपात के बाद उचित देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है ताकि महिला का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जल्दी से पुनःस्थापित हो सके। यहां गर्भपात के बाद की देखभाल के कुछ सुझाव दिए गए हैं:

  1. शारीरिक आराम: गर्भपात के बाद शरीर को कम से कम कुछ दिनों तक आराम की आवश्यकता होती है। भारी काम करने से बचें और शरीर को स्वस्थ होने का समय दें।
  2. स्वच्छता बनाए रखें: संक्रमण से बचने के लिए शरीर की स्वच्छता का ध्यान रखें। डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक दवाइयों का सही तरीके से सेवन करें।
  3. पौष्टिक आहार: शरीर को जल्दी से पुनः स्वस्थ करने के लिए पोषक आहार लें। प्रोटीन, विटामिन, और आयरन युक्त भोजन का सेवन करें।
  4. संक्रमण के लक्षणों पर ध्यान दें: अत्यधिक रक्तस्राव, बुखार, पेट में तेज दर्द या अन्य असामान्य लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। यदि ऐसा कुछ दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  5. भावनात्मक समर्थन: गर्भपात के बाद मानसिक और भावनात्मक तनाव महसूस होना सामान्य हो सकता है। ऐसे समय में किसी से बात करना और भावनात्मक सहायता लेना जरूरी है।

गर्भपात के लिए सर्वोत्तम गर्भपात केंद्र

गर्भपात के लिए सही केंद्र चुनना बेहद जरूरी है ताकि प्रक्रिया सुरक्षित और प्रभावी हो सके। सर्वोत्तम गर्भपात केंद्र चुनते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  1. प्रमाणित डॉक्टर और स्टाफ: यह सुनिश्चित करें कि केंद्र में योग्य डॉक्टर और अनुभवी स्टाफ उपलब्ध हों।
  2. साफ-सुथरा वातावरण: केंद्र का वातावरण स्वच्छ और संक्रमण मुक्त होना चाहिए।
  3. आपातकालीन सेवाएं: यह देखना जरूरी है कि केंद्र पर आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हों ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उपचार किया जा सके।
  4. गोपनीयता: मरीज की जानकारी गोपनीय होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की जानकारी लीक न हो।

6 सप्ताह गर्भपात के बाद डॉक्टर से कब मिलें?

गर्भपात के बाद डॉक्टर से फॉलो-अप अपॉइंटमेंट लेना जरूरी होता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिला का स्वास्थ्य सही है। कुछ विशेष स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, जैसे:

  1. अत्यधिक रक्तस्राव हो।
  2. बुखार या संक्रमण के लक्षण हों।
  3. पेट में तेज दर्द हो।
  4. कमजोरी या चक्कर आना जो समय के साथ ठीक न हो।

गर्भपात से पहले अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से पूछें यह प्रश्न

गर्भपात एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय होता है, और इसे लेने से पहले उचित जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। इस प्रक्रिया के दौरान आप अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न पूछकर सही निर्णय ले सकते हैं।

  1. गर्भपात के लिए कौन सा तरीका मेरे लिए सबसे सुरक्षित है? – यह प्रश्न पूछने से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके स्वास्थ्य और गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार कौन सा तरीका उचित है, जैसे मेडिकल या सर्जिकल गर्भपात।
  2. गर्भपात के बाद मुझे किन दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है? – गर्भपात के बाद सामान्य दुष्प्रभावों की जानकारी होना जरूरी है ताकि आप उन्हें प्रबंधित कर सकें और मानसिक रूप से तैयार रह सकें।
  3. गर्भपात के बाद मुझे कितने समय तक आराम करना चाहिए? – यह जानना आवश्यक है कि आपके शरीर को ठीक होने में कितना समय लगेगा, ताकि आप अपनी गतिविधियों की योजना बना सकें।
  4. गर्भपात के बाद मुझे अपनी अगली मासिक धर्म कब आएगी? – इससे आपको यह अनुमान लगाने में मदद मिलेगी कि आपकी प्रजनन क्षमता कितनी जल्दी पुनः स्थापित हो सकती है।
  5. क्या गर्भपात के बाद फिर से गर्भधारण करने में कोई समस्या हो सकती है? – यह प्रश्न आपकी भविष्य की गर्भधारण की संभावनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देगा।

इन प्रश्नों के माध्यम से आप अपने स्वास्थ्य और गर्भपात की प्रक्रिया के बारे में स्पष्टता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आपको सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

गर्भपात के बाद दुष्प्रभावों के प्रबंधन के लिए युक्तियाँ

गर्भपात के बाद कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे हल्का रक्तस्राव, थकान और पेट में दर्द। इन्हें प्रबंधित करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:

  1. डॉक्टर द्वारा दी गई दर्द निवारक दवाओं का सेवन करें।
  2. शरीर को आराम दें और भारी काम से बचें।
  3. स्वच्छता बनाए रखें ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
  4. पौष्टिक आहार लें ताकि शरीर जल्दी से स्वस्थ हो सके।
  5. डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का नियमित सेवन करें।

क्या गर्भपात से प्रजनन क्षमता (fertility) कम हो जाती है?

आमतौर पर गर्भपात कराने के बाद प्रजनन क्षमता (fertility) या महिला को भविष्य में गर्भधारण करने में परेशानी नहीं होती है। जो महिलाएं गर्भपात करवाती हैं वे भविष्य में आसानी से गर्भवती हो सकती हैं क्योंकि गर्भपात सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाता है और इसका प्रजनन क्षमता में कमी आने से या बांझपन से कोई लेना-देना नहीं है।

कुछ गंभीर मामलों में, गर्भपात कराने से महिला को भविष्य में गर्भधारण करने के जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, यदि महिला को प्रक्रिया के बाद गर्भाशय में संक्रमण हो गया था, जिसका इलाज नहीं किया गया, तो इससे भविष्य में गर्भधारण में जटिलताओं का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है।

फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय में संक्रमण की जटिलताएं, जैसे कि पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी), एक्टोपिक प्रेगनेंसी के खतरे को भी बढ़ा सकती हैं – एक ऐसी स्थिति जिसमें गर्भाशय के बाहर अंडे का आरोपण शामिल होता है।

छठे सप्ताह के गर्भपात के बाद प्रजनन संबंधी समस्याओं की संभावना काफी कम होती है, और अधिकांश महिलाएं गर्भवती होने का प्रयास तब कर सकती हैं जब उन्हें लगे कि वे इसके लिए शारीरिक और भावनात्मक रूप से तैयार हैं।

क्या भारत में 6 हफ्ते में गर्भपात वैध है?

भारत में, महिलाएं गर्भधारण के 20 हफ्ते तक गर्भपात करवा सकती हैं यदि डॉक्टर उन्हें गर्भपात के लिए उपयुक्त समझता है। हालाँकि, कुछ शर्तें लागू होती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • गर्भपात केवल तभी किया जा सकता है जब गर्भवती महिला की जान को खतरा हो या भ्रूण में गंभीर असामान्यताएं हो।
  • महिला या उसके कानूनी अभिभावक (यदि महिला नाबालिग है या मानसिक असामान्यताएं हैं) की सहमति आवश्यक है।
  • यह तब किया जा सकता है जब प्रेगनेंसी बलात्कार या अनाचार के कारण हुई हो, और यदि इससे महिला के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित रहा हो या यदि भ्रूण गंभीर रूप से असामान्यताओं के साथ पैदा हुआ हो।
  • भारत में केवल विशेष योग्यता वाले पंजीकृत डॉक्टर (Register Doctor) को ही गर्भपात करने की अनुमति है। जबकि एमटीपी अधिनियम एक संघीय कानून है, गर्भपात के संबंध में अलग-अलग राज्यों के अपने कानून हो सकते हैं। कुछ राज्य गर्भपात पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं, जैसे अनिवार्य परामर्श, प्रतीक्षा अवधि, या माता-पिता की सहमति।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गर्भपात कानून परिवर्तन के अधीन हैं, इसलिए गर्भपात कराने वाले महिलाओं को गर्भपात की नवीनतम कानूनी वैधता की जानकारी के लिए हेल्थकेयर या कानून विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

6 हफ्ते में गर्भपात का खर्च कितना आता है?

प्रेगेनेंसी के 6 हफ्ते में गर्भपात का खर्च 2000 रुपये से 5000 रुपये के बीच हो सकता है। लेकिन, यह गर्भपात की अनुमानित खर्च की राशि है, और महिला को गर्भपात के कुल खर्च के लिए अलग-अलग राशि  का भुगतान करना पड़ सकता है। पहले उल्लिखित लागत प्रेगनेंसी के चिकित्सीय समापन की लागत थी, जो 6 महीने के गर्भ को समाप्त करने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली विधि है। जटिलताओं के मामले में, यदि डॉक्टरों को अतिरिक्त डी एंड सी प्रक्रिया या कोई अन्य सर्जिकल प्रक्रिया करने की आवश्यकता होती है, तो गर्भपात का खर्च बढ़ सकता है। कुछ अन्य कारक जो इस प्रक्रिया की लागत को प्रभावित कर सकते हैं उनमें नैदानिक ​​​​परीक्षणों की लागत, डॉक्टर की फीस, क्लीनिक का स्थान आदि शामिल हैं।

भारत में 6 हफ्ते के गर्भपात के लिए बीमा कवरेज मिलता है?

आपके पास कोई भी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी क्यों न हो, गर्भपात कराने वालों को इस बात का विशेष यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत में अधिकांश बीमा कंपनियां अपने स्वास्थ्य बीमा या मेडिक्लेम पॉलिसियों गर्भपात के खर्च को कवर नहीं करती हैं। कई मामलों में गर्भपात चिकित्सकीय दृष्टि से आवश्यक प्रक्रिया नहीं है और अधिकांश महिलाएं व्यक्तिगत कारणों से गर्भपात कराना चुनती हैं। इसलिए, वे पूरी तरह से अपनी जेब से भुगतान करने के लिए बाध्य हैं।

सामान्यता, कुछ मामलों में, जब चिकित्सकीय रूप से आवश्यक परिदृश्यों में गर्भपात किया जाता है, जैसे कि जब गर्भवती महिला या बच्चे के स्वास्थ्य को खतरा हो, तो इसे गर्भपात अधिनियम के तहत कवर किया जा सकता है। लेकिन, यह गर्भपात के खर्च का कवरेज पूरी तरह से स्वास्थ्य बीमा कंपनियों और उनके विशिष्ट नियमों और शर्तों पर निर्भर है। महिला को यह समझने के लिए अपने स्वास्थ्य बीमा सलाहकार से संपर्क करना चाहिए कि क्या गर्भपात का खर्च बीमा के तहत कवर किया जाएगा।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भपात के लिए कौन पात्र नहीं है?

भारत में, गर्भपात सभी विवाहित और अविवाहित महिलाओं के लिए कानूनी है, लेकिन कुछ शर्तों के तहत। महिला को अपनी या अपने अभिभावक की सहमति की आवश्यकता है (यदि वह नाबालिग है या मानसिक रूप से परेशान है)। उसका स्वस्थ रहना भी जरूरी है।

गर्भपात के भावनात्मक प्रभावों से कैसे निपटें?

जो महिलाएं गर्भपात कराती हैं, उन्हें कुछ भावनात्मक प्रभावों का अनुभव होता है। वह व्यक्तिगत रूप से निराश महसूस कर सकती है, लेकिन यह काफी सामान्य है। गर्भपात के भावनात्मक दुष्प्रभावों को प्रबंधित करने के लिए एक महिला कई चीजें कर सकती है, जैसे दोस्तों और परिवार से बात करना, खुद को याद दिलाना कि गर्भपात क्यों आवश्यक था, किसी पेशेवर से उपचार लेना आदि।

6 हफ्ते के गर्भपात के बाद मैं कब काम फिर से शुरू कर सकती हूं?

छठे सप्ताह के गर्भपात के बाद, जो आम तौर पर दवा की मदद से किया जाता है, एक महिला एक दिन के भीतर या जैसे ही उसके लक्षण कम हो जाते हैं, अपने काम पर लौटने की उम्मीद कर सकती है। गर्भपात के बाद सामान्य गतिविधि फिर से शुरू करने से पहले पूरी तरह से आराम करना और डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।

क्या मैं गर्भपात के बाद गर्भवती हो सकती हूँ?

हाँ, गर्भपात से किसी महिला की भविष्य में गर्भधारण करने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, और जब वह इसके लिए तैयार महसूस करती है तो वह गर्भवती हो सकती है।

क्या 6 सप्ताह की प्रेगनेंसी को सर्जरी से समाप्त किया जा सकता है?

आमतौर पर, प्रेगनेंसी के 6 हफ्ते का गर्भपात (bachcha girane ki dawai) से किया जाता है और 6 हफ्ते का गर्भपात के लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। जबकि छठे सप्ताह के गर्भपात के मामले में दवा पहली पसंद है, जटिलताएँ उत्पन्न होने पर डॉक्टरों को डी एंड सी नामक एक अतिरिक्त शल्य चिकित्सा प्रक्रिया करने की आवश्यकता हो सकती है।

क्या 6 सप्ताह की प्रेगनेंसी का चिकित्सीय गर्भपात दर्दनाक है?

चिकित्सीय गर्भपात दर्दनाक हो सकता है और ऊतक गुजरने पर गंभीर ऐंठन हो सकती है। इस प्रक्रिया में किसी एनेस्थीसिया का उपयोग नहीं किया । इसलिए महिलाों को थोड़ा दर्द सहना पड़ता है।हालाँकि, जब ऊतक शरीर से पूरी तरह बाहर निकल जाते हैं तो दर्द आमतौर पर कम हो जाता है। इस प्रकार महिला भी अधिक सहज महसूस करने लगती है। लेकिन, यदि दर्द बना रहता है, तो समय रहते बीमा प्रदाता से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।

6 सप्ताह में गर्भपात के लक्षण क्या है?

योनि से रक्तस्राव होना, पेट के निचले हिस्से में ऐंठन होना, पीठ में तेज दर्द होना, मतली होना, थकावट होना|

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MEDICALLY REVIEWED CONTENT

Dr. Ketaki Tiwari
Dr. Ketaki Tiwari
MBBS, MS-Obs & Gyne
18 Years Experience yrs experience
Pristyn Care Team
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Healthcare Expert
Peer reviewed · Apr 2026

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