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अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं और आपके पैरों में किसी तरह का कोई जख्म, घाव या छाला नजर आए तो आपको इसे नजरंअदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच और इलाज करानी चाहिए। क्योंकि यह डायबिटिक फुट अल्सर भी हो सकता है। समय पर इलाज कर इस समस्या को हमेशा के लिए ठीक तथा पैर को खराब होने से बचाया जा सकता है। शोध ने इस बात की पुष्टि कि है कि लगभग 10% मरीज अपने जीवन में कम से कम एक बार डायबिटिक फुट अल्सर से अवश्य पीड़ित होते हैं। 

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डायबिटिक फुट अल्सर एक गंभीर समस्या है जिसके प्रति जितनी जल्दी हो सके एक्शन लेने कि आवश्यकता होती है। क्योंकि यह आगे जाकर जानलेवा बीमारी का रूप भी ले सकता है। इस ब्लॉग में आज हम आपको डायबिटिक फुट अल्सर के कारणों, लक्षणों और इसके बेस्ट इलाज के बारे में बताने वाले हैं। इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद आप इस बात को अच्छी तरह से समझ जाएंगे कि इस समस्या से पीड़ित होने कि स्थिति में आपको किन बातों का ध्यान रखना है तथा कैसे इसका बेहतर इलाज करना है।    

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डायबिटिक फुट अल्सर क्या है — What is Diabetic Foot Ulcer in Hindi — Diabetic Foot Ulcer in Hindi — Diabetic Foot Ulcer Kya Hai

डायबिटीज एक बीमारी है जो आमतौर पर शरीर में रक्त शर्करा अधिक हो जाने के कारण होती है। जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है। डायबिटीज के कारण पैरों में घाव या छाले भी होते हैं। इनपर ध्यान न देने या समय पर इनका इलाज न कराने से इनमें इंफेक्शन हो जाता है तथा आगे जाकर यह गंभीर रूप ले लेते हैं। इन्ही गंभीर छाले या घाव को मेडिकल की भाषा में डायबिटिक फुट अल्सर कहा जाता है। डायबिटिक फुट अल्सर अपने शुरूआती स्टेज में बहुत ही छोटे एवं सामान्य से घाव होते हैं जिन्हे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। 

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डायबिटिक फुट अल्सर कितना गंभीर है — How Serious Diabetic Foot Ulcer is in Hindi — Diabetic Foot Ulcer Kitna Ghambhir Hai 

शरीर के दूसरे हिस्सों कि तुलना में पैरों के टिशूज ज्यादा मुलायम होते हैं। यही कारण है कि अगर आपके पैरों में इंफेक्शन होता है तो उसे मांपेशियों और हड्डियों तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता है। जहां तक बात डायबिटीज के मरीज कि है तो उनमें पहले से ही शुद्ध ऑक्सीजनयुक्त खून कि समस्या होती है। यही कारण है कि उनके पैरों में इंफेक्शन होना ज्यादा खतरनाक होता है। कई बार लापरवाही बरतने पर पैरों में इंफ्केशन इतना अधिक फैल जाता है कि पैर काटने तक कि नौबत आ जाती है ताकि इंफेक्शन को ऊपर शरीर में दूसरे अंगों तक फैलने से रोका तथा मरीज को मरने से बचाया जा सके।       

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डायबिटिक फुट अल्सर के कारण — Causes of Diabetic Foot Ulcer in Hindi — Diabetic Foot Ulcer Kyon Hota Hai 

दूसरी अन्य बीमारियों कि तरह डायबिटिक फुट अल्सर के भी कुछ खास एवं संभावित कारण होते हैं। अगर आप पहले ही इन कारणों के बारे में जानकर कुछ सावधानियां बरतें तो इस समस्या की रोकथाम कि जा सकती है। इसके मुख्य एवं सबसे बड़े कारणों में शरीर में डायबिटीज का बढ़ना है। जब शरीर में शुगर लेवल आवश्यकता से अधिक बढ़ जाता है तब शरीर में छोटे मोटे घाव और फुंसी आने लगते हैं। इसी दौरान पैरों में भी घाव और छाले होते हैं जो शुरू में तो बहुत ही छोटे होते हैं। लेकिन लापरवाही की वजह से आगे बड़े होकर गंभीर रूप धारण कर लेते हैं। अगर आप इस बीमारी को खुद से दूर रखना चाहते हैं तो हमेशा अपने डायबिटीज को कंट्रोल रखने की कोशिश करें। इसके लिए आपको सबसे पहले अपने जीवनशैली तथा खासकर खान पान में सकारात्मक सुधार लाना पड़ेगा।        

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डायबिटिक फुट अल्सर के लक्षण — Symptoms of Diabetic Foot Ulcer in Hindi — Diabetic Foot Ulcer Ke Lakshan 

डायबिटिक फुट अल्सर से पीड़ित होने की स्थिति में आप खुद में कुछ लक्षणों को महसूस कर सकते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देने और डॉक्टर से संपर्क करने के बाद इस बात की पुष्टि हो जाती है की आपको डायबिटिक फुट अल्सर है या नहीं। फिर इसके आधार आपके डॉक्टर इलाज के माध्यम का चुनाव करते हैं। डायबिटिक फुट अल्सर के लक्षणों में पैरों के स्किन के रंग का बदलना, पैरों में सूनापन और सनसनाहट होना, पैरों में संवेदनशीलता का कम होना, घाव होना, कभी कभी घाव से मवाद आना, चलने पर दर्द होना आदि शामिल हैं। अगर आप इनमें से किसी भी लक्षण को खुद में अनुभव करते हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर अपने घाव की जांच और इलाज कराएं। 

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डायबिटिक फुट अल्सर का इंफेक्शन शरीर में काफी तेजी से फैलता है। अगर इसके शुरुआती स्टेज में ही पता लगाकर इलाज करा लिया जाए तो इस बीमारी को आसानी से खत्म किया जा सकता है। वहीं अगर इसे लंबे समय तक बिना इलाज के छोड़ दिया गया तो इंफेक्शन धीरे धीरे पैरों के स्किन से पैरों की मांसपेशियों और हड्डियों में फैलना शुरू हो जाता है। फिर उसके बाद वह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैलने लगता है जिसके बाद मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। यही कारण है की विशेषज्ञ इसके कारण को देखते ही डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच और इलाज कराने का सुझाव देते हैं। (आगे पढ़ें: पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ने के कारण, लक्षण और इलाज)             

डायबिटिक फुट अल्सर का इलाज — Treatment of Diabetic Foot Ulcer in Hindi — Diabetic Foot Ulcer Ka Ilaj 

डायबिटिक फुट अल्सर का इलाज करने के लिए ढेरों उपाय मौजूद हैं। अगर आप घर बैठे अपनी इस समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं सबसे पहले अपने ब्लड शुगर के स्तर को कम यानी की संतुलित करें। ऐसा करने से आपके घाव का इंफेक्शन फैलना कम हो जाएगा तथा आपके घाव तेजी से ठीक होने लगेगा। ब्लड शुगर को संतुलित रखने पर आपका घाव धीरे धीरे सुखकर खत्म हो जाएगा। ब्लड शुगर को कम करने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल और खान पान में पॉजिटिव बदलाव लाने होंगे। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप डॉक्टर से मिलकर बात कर सकते हैं। 

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बुनियादी तौर पर आपको मीठी चीजों का सेवन बंद या कम कर देना चाहिए, सुबह और शाम के वक्त हल्का फूलका व्यायाम करना चाहिए तथा डॉक्टर के संपर्क में बने रहना चाहिए। आपका ब्लड शुगर लेवल कितना है इस बात को जानने के लिए आप ब्लड शुगर टेस्ट करने वाली मशीन खरीद सकते हैं जिसकी मदद से आप जब चाहें तब अपने डायबिटीज की स्थिति को जान और समझ सकते हैं। आपको इससे काफी सहूलियत और फायदा होगा। अगर आपका घाव लाइफस्टाइल और खान पान में बदलाव लाने के बाद भी ठीक न हो तब आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

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डॉक्टर आपके घाव की गंभीरता की जांच करने के बाद घाव को साफ करके उसकी ड्रेसिंग कर सकते हैं। ऐसा करने से घाव का मवाद बाहर आ जाता है जिसके कारण घाव जल्दी ठीक हो जाता है। घाव की सफाई करने के बाद डॉक्टर उसकी ड्रेसिंग करते हैं जिसे कुछ दिनों तक रोजाना बदलना होता है। घाव की सफाई होने के बाद आपको अपने पैर को संभाल कर रखने की आवश्यकता होती है ताकि उसपर चोट न लगे। इस दौरान भी डॉक्टर आपको अपने खान पान खास ध्यान देने का सुझाव देते हैं ताकि आपके ब्लड शुगर का लेवल बढ़े।

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अगर डायबिटिक फुट अल्सर की सफाई करने के बाद भी कोई फर्क दिखाई नहीं देता है तब डॉक्टर सर्जरी करने की सलाह देते हैं। क्योंकि इस दौरान सर्जरी के अलावा दूसरा कोई विकल्प भी नहीं बचता है। सर्जरी से अल्सर को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। शायद यही कारण है कि इस समस्या से पीड़ित मरीज सर्जरी को प्राथमिकता देते हैं। सर्जरी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज को जेनेरल अनेस्थिसिया देते हैं ताकि सर्जरी के दौरान मरीज को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। फिर उसके बाद घाव को काटकर पैर से बाहर निकाल दिया जाता है।

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उसके बाद घाव वाली जगह पर दवा एवं मरहम को लगाकर डॉक्टर बैंडेज बांध देते हैं जिसकी हर एक या दो दिन के अंदर ड्रेसिंग की जाती है। डायबिटिक फुट अल्सर को ठीक करने का यह सबसे सफल और सुरक्षित तरीका है। अगर आपको भी डायबिटिक फुट अल्सर है तो आप डॉक्टर से मिलकर इसकी सर्जरी करवा सकते हैं। सर्जरी करने के बाद इंफेक्शन फैलने का खतरा खत्म हो जाता है। सर्जरी के बाद आपको 4-5 सप्ताह तक आराम करने की जरूरत होती है फिर आपका घाव पूरी तरह से भर जाता है और आपका अल्सर हमेशा के लिए ठीक हो जाता है।                   

डायबिटिक फुट अल्सर से खुद को कैसे बचाएं — Precautions From Diabetic Foot Ulcer in Hindi — Diabetic Foot Ulcer Se Khud Ko Kaise Bachaye

ब्लॉग के शुरुआत में ही पढ़ने के बाद आपको यह बात समझ में आ गई होगी कि डायबिटीज से पीड़ित मरीज को डायबिटिक फुट अल्सर होने का सबसे अधिक खतरा होता है। अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको यह बीमारी होने कि अधिक संभावना है। लेकिन कुछ उपाय हैं, कुछ तरकीब हैं जिनपर ध्यान देने तथा कुछ सावधानियां बरतने के बाद आप खुद को इस समस्या से सुरक्षित रख सकते हैं। आप अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल रखकर डायबिटिक फुट अल्सर के इंफेक्शन कि संभावना को काफी हद तक कम कर सकते हैं। 

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क्योंकि खून में जब ग्लूकोज का लेवल बैलेंस रहता है तो आपका चोट, घाव या जख्म का एहसास काफी जल्दी हो जाता है। साथ ही, शरीर में जब ब्लड शुगर सामान्य रहता है तो घाव तेजी से भरते यानी ठीक होते हैं। जबकि ब्लड शुगर का लेवल ज्यादा होने पर उलटा होता है। शरीर में ब्लड शुगर का लेवल ज्यादा होने पर घाव तेजी से बढ़ता है तथा उसे ठीक होने में बहुत समय लगता है। इसलिए अपने पैरों पर ध्यान दें। पैरों में किसी तरह कि कोई परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच और इलाज कराएं। अगर आपको डायबिटिक फुट अल्सर है तो डॉक्टर इंफेक्शन वाले हिस्से से स्किन को काटकर अलग कर देते हैं जिसकी वजह से घाव भरने कि प्रक्रिया काफी तेज हो जाती है। 

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स्किन काटने के बाद डॉक्टर वहां पर बैंडेज बांध देते हैं जिसे हर एक दिन के अंतराल पर बदलना होता है। ज्यादा दिनों तक बैंडेज को नहीं बदलने से फिर से इंफेक्शन होने का खतरा होता है। इसलिए ऑपरेशन के बाद बैंडेज को बदलना या बदलवाना न भूलें। ऑपरेशन के बाद आपको कुछ दिनों तक अपने पैर को आराम देने कि आवश्यकता होती हैं इसलिए कम से कम चलने तथा जख्म वाले पैर पर कम से कम भार देने कि कोशिश करें। आमतौर पर इस प्रक्रिया के बाद आपका जख्म 4-5 सप्ताह के अंदर ठीक हो जाता है। अगर ठीक न हो तो आपको डॉक्टर से मिलकर इसकी फिर से जांच करानी चाहिए।               

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निष्कर्ष — Conclusion 

डायबिटीज से पीड़ित होने कि स्थिति में घाव होने पर आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि ये जल्दी ठीक नहीं होते हैं तथा इनके इंफेक्शन बढ़ने का खतरा भी ज्यादा होता है। डायबिटिक फुट अल्सर के साथ भी यही समस्या है। अगर समय पर इसका सही इलाज नहीं कराया गया तो बहुत ही कम समय में इंफेक्शन शरीर में चारों तरफ फैलना शुरू हो जाता है और एक वक्त के बाद यह जानलेवा बीमारी का रूप भी ले सकता है। इसलिए यह आवश्यक है आप आपने पैरों के छाले या घाव को नजरअंदाज नहीं बल्कि डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बात करें। डॉक्टर जांच करने के बाद आपको बेहतर इलाज का सुझाव देंगे।        

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