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लाइफस्टाइल खराब होने तथा खासकर अपने खान पान पर खास ध्यान न देने के कारण आज पुरुषों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। जिसमें इनफर्टिलिटी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, लो स्पर्म काउंट आदि शामिल हैं। Best Treatment for Varicocele in Hindi इन्ही बीमारियों में से एक वैरीकोसेल है। जिससे पीड़ित होने की स्थिति में पुरुष को सेक्सुअल लाइफ से संबंधित कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रिस्टीन केयर के इस खास ब्लॉग में हम आपको वैरीकोसेल के कारण, लक्षण और इसके सबसे बेस्ट इलाज के बारे में विस्तार से बताएंगे। इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद आप अपनी इस समस्या से बहुत ही आसानी से हमेशा के लिए छुटकारा पाने में कामयाब हो सकेंगे।     

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Table of Contents

वैरीकोसेल क्या है — What Is Varicocele In Hindi — Varicocele In Hindi — Varicocele Kya Hai 

अंडकोष (टेस्टिकल) की थैली में नसों के आकार के बढ़ने की स्थिति को मेडिकल की भाषा में वैरीकोसेल कहते हैं। वैरीकोसेल स्पर्म प्रोडक्शन और लगभग उन सभी फंक्शन को प्रभावित करता है जो आगे जाकर बांझपन (infertility) का कारण बन सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक, सौ में से लगभग दस लोग वैरीकोसेल से पीड़ित होते हैं। Varicocele Ka Jad Se Ilaj आमतौर वैरीकोसेल टेस्टिकल की बायीं तरफ पाया जाता है। क्योंकि पुरुष के शरीर की रचना के हिसाब से टेस्टिकल के दोनों तरफ की बनावट अलग अलग होती है। 

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वैरीकोसेल के कितने प्रकार होते हैं — What Are The Types Of Varicocele In Hindi — Varicocele Ke Kitne Prakar Hote Hain

वैरीकोसेल तीन प्रकार के होते हैं। इन्हे हम ग्रेड 1 वैरीकोसेल, ग्रेड 2 वैरीकोसेल और ग्रेड 3 वैरीकोसेल के नाम से जानते हैं। ग्रेड 1 वैरीकोसेल की स्थिति में अंडकोष के थैली की नसें बढ़ जाती है। ये दिखाई तो नहीं देती हैं लेकिन इन्हे वलसल्वा मनुवेर (Valsalva Maneuver) के जरिए महसूस जरूर किया जा सकता है। वलसल्वा मनुवेर सांस लेने की एक तकनीक है जिससे छाती में दबाव बढ़ता है। यह शरीर में बहुत सारे प्रभाव डालती है जैसे कि दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर में बदलाव लाना। Best Treatment for Varicocele in Hindi साथ ही यह स्पर्म प्रोडक्शन और दूसरे उन फंक्शन को कम करता है जिनकी वजह से प्रजनन क्षमता में कमी आती है। 

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ग्रेड 2 वैरीकोसेल ग्रेड 1 और ग्रेड 3 के बीच की एक स्थिति है। इसकी स्थिति में अंडकोष की थैली में नसों के आकार के बढ़ने की वजह से यह स्पर्म प्रोडक्शन और उन फंक्शन को प्रभावित करता है जो आगे जाकर बांझपन का कारण बन सकते हैं। ग्रेड 3 वैरीकोसेल की स्थिति में टेस्टिकल की नसें बढ़ जाती है और साफ तौर पर बाहर की तरफ दिखाई देती हैं। यह स्पर्म प्रोडक्शन और दूसरे उन फंक्शन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जिसकी वजह से प्रजनन क्षमता में कमी आती है। Varicocele Ka Jad Se Ilaj रिसर्च के मुताबिक सौ में से लगभग दस से पंद्रह लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। 

वैरीकोसेल क्यों होता है — Why Does Varicocele Occur In Hindi — Varicocele Kyun Hota Hai

हर बीमारी की तरह वैरीकोसेल के भी कुछ खास कारण होते हैं। नसों में वॉल्व मौजूद होता है जिनका काम खून को बड़ी नसों की ओर एक दिशा में ले जाना होता है। लेकिन कुछ समस्या के कारण ये वॉल्व ठीक तरह से काम नहीं करते हैं। जिसकी वजह से खून दूसरी जगह न जाकर एक ही जगह जमा हो जाता है। वैरीकोसेल के वॉल्व में स्पर्मेटिक कॉर्ड्स होते हैं जिनका काम ब्लड फ्लो को संतुलित बनाए रखना होता है। Best Treatment for Varicocele in Hindi लेकिन जब यह अपना काम करना बंद कर देते हैं तो वैरीकोसेल की समस्या शुरू हो जाती है। ये समस्याएं खासकर खड़े होकर पानी पीने, स्क्रोटम में चोट लगने या घाव बनने, शुक्राणु कॉर्ड में रुकावट होने, बिना प्रोटेक्टिव गियर के व्यायाम करने तथा एपिडिडीमाइटिस जैसे संक्रमण से पीड़ित होने के कारण होती है।

वैरीकोसेल के क्या लक्षण होते हैं — What Are The Symptoms Of Varicocele In Hindi — Varicocele Ke Kya Lakshan Hote Hain

शुरुआत में वैरीकोसेल के लक्षणों का पता नहीं लग पाता है। क्योंकि लोग इसके लक्षण को छोटी मोटी समस्या समझकर छोड़ देते हैं। डॉक्टर का मानना है की वैरीकोसेल होने पर स्क्रोटम का आकार बढ़ जाता है। आमतौर पर इसमें दर्द नहीं होता है लेकिन कभी कभी हल्का दर्द हो भी सकता है। अगर इसके लक्षणों का शुरुआत में ही पता चल जाए तो कुछ दवाओं, योग, व्यायाम या घरेलू नुस्खों की मदद से बहुत कम समय में इसे परमानेंटली ठीक किया जा सकता है। 

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हम आपको वैरीकोसेल के कुछ खास लक्षणों के बारे में बता रहे हैं जिनकी मदद से आप या आपके डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलेगी की आप इस बीमारी से पीड़ित हैं या नहीं। फिर डॉक्टर स्क्ट्रोम की जांच के बाद इस बात की पुष्टि करते हैं। इसके लक्षणों में स्क्रोटम की मुड़ी हुई नसों का बाहर साफ तौर पर दिखाई देना, स्क्रोटम की नसों का मुड़ना या एक जगह जमा होना, गांठ की वजह से दर्द नहीं होना, अंडकोष की एक तरफ गांठ होना, स्क्रोटम में सूजन होना, स्क्रोटम में दर्द होना, गर्मी में दर्द का बढ़ जाना, स्क्रोटम का आकर सामान्य से बड़ा होना आदि शामिल हैं।  

वैरीकोसेल की जांच — Diagnosis Of Varicocele In Hindi — Varicocele Ki Janch Kaise Ki Jati Hai 

वैरीकोसेल से पीड़ित मरीज का इलाज करने से पहले डॉक्टर कुछ जांच करते हैं ताकि वह बीमारी और उसकी स्थिति को अच्छी तरह से समझ सकें। वे शारीरिक परीक्षण करते हैं। टेस्टिकल की थैली में पानी है या नहीं, इस बात को जानने के लिए खून की जांच और एक्स-रे करते हैं। साथ ही साथ सूजन होने के कारण को जानने के लिए अल्ट्रासाउंड करने का सुझाव भी दे सकते हैं। 

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शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर कोमलता की जांच करता है। वीर्य विश्लेषण (सीमेन एनालिसिस टेस्ट) और हार्मोन परीक्षण की मदद से डॉक्टर कूप उत्तेजक हार्मोन (Follicle Stimulating Hormone) और कम टेस्टोस्टेरोन (Low Testosterone) का पता लगाने के लिए करते हैं। टेस्टिकल का अल्ट्रासाउंड करते हैं। अल्ट्रासाउंड के दौरान High Frequency का इस्तेमाल करके टेस्टिकल की फोटो ली जाती है। इसके मदद से डॉक्टर को इस बात की पुष्टि करने में मदद मिलती है कि टेस्टिकल में वैरीकोसेल होने के कौन कौन से लक्षण हैं।  

वैरीकोसेल का बेस्ट इलाज — Best Treatment Of Varicocele In Hindi — Varicocele Ka Best Ilaj 

ओपन वैरीकोसेलेटॉमी (Open Varicocelectomy) — सर्जरी की दृष्टिकोण से ओपन वैरीकोसेलेटॉमीकाफी सफल और सुरक्षित माना जाता है। इलाज की इस प्रक्रिया में बेकार नसों का शारीरिक रूप से पता लगाने के लिए ग्रोइन में एक छोटा सा कट लगाते हैं और फिर बेकार नसों को हमेशा के लिए बंद कर देते हैं। इसके बाद खून के प्रवाह को दूसरी स्वस्थ नसों से जोड़ देते हैं। इस सर्जरी के पूरा होने के बाद नसों में खून के प्रवाह से संबंधित कोई परेशानी सामने नहीं आती है। Best Treatment for Varicocele in Hindi सर्जरी के दौरान और बाद कम से कम दर्द होता है और मरीज को ठीक होने में समय भी काफी कम लगता है। सर्जरी के एक दिन के बाद मरीज अपने दैनिक जीवन को वापस फिर से शुरू कर सकते हैं। 

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वैरीकोसेल प्रतीक (Varicocele Embolization) — इलाज की यह प्रक्रिया रेडियोलॉजिस्ट द्वारा एक न्यूनतम आक्रामक आउट पेशेंट प्रक्रिया के रूप में की जाती है। यह एक बहुत ही सुरक्षित प्रक्रिया है। जिसे Interventional Radiologist के द्वारा पूरी सावधानी के साथ किया जाता है। इलाज की इस प्रक्रिया के दौरान रेडियोलॉजिस्ट धातु का तार (Metal Coil) और स्क्लेरोजिंग सोलुशन (Sclerosing Solution) को एक कैथिटर (Catheter) के जरिए ब्लड वेसेल्स में इंसर्ट करके प्रभावित नसों को कैथिटर की मदद से बंद कर देते हैं ताकि वे ब्लड फ्लो को और आगे न बढ़ा पाएं। इससे यह बीमारी यहीं रुक जाती है और फिर आगे इलाज की मदद से हमेशा के लिए ठीक हो जाती है।     

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माइक्रोस्कोपिक वैरीकोसेलेटॉमी (Microscopic Varicocelectomy) — यह सर्जरी सुरक्षित लेकिन काफी जटिल प्रक्रिया है। इसके दौरान बेकार नसों की पहचान करने के लिए सर्जन एक माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल करते हैं। इस तकनीक से सर्जन टेस्टिकल के ऊपर 1 cm का एक चीरा लगाते हैं और फिर बेकार नसों को बंद कर देते हैं। माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल करते हुए सर्जन सभी छोटी नसों को बंद कर देते हैं और वैस डेफेरेंस (Vas Deferens), वृषण धमनियों (Testicular Arteries) और लसीका जल निकासी (Lymphatic Drainage) को छोड़ देते हैं। Best Treatment for Varicocele in Hindi इस प्रक्रिया को पूरा होने में दो से तीन घंटे का समय लगता है और मरीज को सर्जरी वाले दिन ही हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। 

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लेप्रोस्कोपिक वैरीकोसेलेटॉमी (Laparoscopic Varicocelectomy) — लेप्रोस्कोपिक एक सर्जिकल डायग्नोस्टिक प्रक्रिया है जिसके जरिए वेरीकोसील, दिल, गॉल ब्लैडर, फेफड़े, किडनी, अपेंडिक्स से लेकर हर्निया के साथ साथ छोटी और बड़ी आंत का इलाज किया जाता है। कैंसर, ट्यूमर और महिला के प्रेग्नेंट ना होने के कारणों का पता लगाने लगाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

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अनेकों खासियत की वजह से ये बस एक इलाज का माध्यम ही नहीं बल्कि कई बीमारियों की जांच की प्रक्रिया भी है। लेप्रोस्कोपी इलाज का सबसे बेहतर माध्यम माना जाता है। इसका प्रयोग कर इलाज करते समय शरीर में बहुत ही छोटा कट लगाया जाता है, जो काफी कम समय में ठीक हो जाता है। साथ ही इंफेक्शन होने का रिस्क भी कम होता है और सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के फायदे — Benefits Of Laparoscopic Surgery In Hindi — Laparoscopic Surgery Ke Fayde 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के समय ब्लीडिंग का रिस्क कम रहता है क्योंकि ओपन सर्जरी की तुलना में इस सर्जरी के कट का साइज बहुत छोटा होता है। इसलिए ब्लीडिंग होने और मरीज के शरीर में खून चढ़ाने का खतरा लगभग ना के बराबर होता है। कट का साइज छोटा होने की वजह से सर्जरी के बाद होने वाला दर्द कम हो जाता है। इसकी वजह से मरीज को ज्यादा दर्द नहीं होता है और ना ही उसे लंबे समय तक पेन किलर लेने की जरुरत पड़ती है। 

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सर्जरी के बाद वाला कट का छोटे से निशान बनने की संभावना होती है। जबकि ओपन सर्जरी की वजह से हुए बड़े जख्म में जो स्कार टिश्यू बनते हैं उनसे इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। ओपन सर्जरी की तुलना में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में इंटरनल ओर्गंस (Internal Organs) का बाहरी दूषित पदार्थों (External Contaminants) से संपर्क बहुत कम होता है। इसलिए सर्जरी के बाद इंफेक्शन होने का खतरा कम हो जाता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद इंफेक्शन से बचने के लिए लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाएं नहीं खानी पड़ती हैं। 

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लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज को ज्यादा समय तक हॉस्पिटल में रूकने की जरुरत नहीं पड़ती है और वह बहुत ही जल्दी ठीक भी हो जाते हैं। सामान्य तौर पर मरीज को उसी दिन या फिर उसके अगले दिन डिस्चार्ज कर दिया जाता है। रिकवरी जल्दी होने से कुछ ही दिन में मरीज रूटीन लाइफ को शुरू कर सकते हैं। जबकि ओपन सर्जरी में रिकवरी बहुत धीमी होती है और मरीज को काफी दर्द का सामना भी करना पड़ता है। ओपन सर्जरी की तुलना में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी ज्यादा सुरक्षित और सफल होती है। इस सर्जरी के बाद मरीज को बिलकुल भी किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है। 

क्या वैरीकोसेल को दवा के जरिए ठीक किया जा सकता है — Can Varicocele Be Cured By Medication In Hindi — Kya Varicocele Ko Dawa Se Thik Kiya Ja Sakta Hai 

वैरीकोसेल को ठीक करने वाली दवा अभी तक नहीं आई है। लेकिन कुछ दवाइयां हैं जो इसके दर्द को कम कर सकती हैं। वैरीकोसेल के लिए सबसे बेहतर उपाय सर्जरी के द्वारा इसका इलाज कराना है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी इस बीमारी को हमेशा से लिए खत्म कर देती है। सर्जरी में मरीज को जरा भी दर्द और ब्लीडिंग नहीं होती है। यह बहुत कम समय में पूरी हो जाती है। सर्जरी के बाद दो से तीन दिन के अंदर मरीज अपनी रूटीन लाइफ शुरू कर सकते हैं। लेकिन ज्यादा भारी सामान उठाने के लिए सख्ती से मना किया जाता है।

प्रिस्टीन केयर में वैरीकोसेल का लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा इलाज किया जाता है Pristyn Care Treats Varicocele With Laparoscopic Surgery In Hindi  

वैरीकोसेल का बेस्ट इलाज करने के अलावा, वैरीकोसेल की सर्जरी के दिन प्रिस्टीन केयर अपने मरीज को कैब फैसिलिटी देते हैं जो सर्जरी के दिन उन्हें घर से हॉस्पिटल और सर्जरी के बाद हॉस्पिटल से घर वापस छोड़ती है। मरीज के हॉस्पिटल पहुंचने से पहले उनके लिए प्रिस्टीन टीम की तरफ से एक केयर बड्डी मौजूद रहता है जो इलाज से जुड़े सभी पेपरवर्क को पूरा करता है। साथ ही इलाज के बाद, जब तक मरीज हॉस्पिटल में रूकते हैं, केयर बड्डी उनकी देखरेख और सभी जरूरी चीजों का ख्याल रखता है।

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दूसरे प्राइवेट हॉस्पिटल की तुलना में प्रिस्टीन केयर हॉस्पिटल में वैरीकोसेल का लेप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा इलाज बहुत कम खर्चे में किया जाता है। साथ ही साथ यहां जीरो ईएमआई की सुविधा भी उपलब्ध है। प्रिस्टीन केयर सभी डायग्नोस्टिक टेस्ट पर 30% तक की छूट, गोपनीय परामर्श, डीलक्स रूम की सुविधा और सर्जरी के बाद फ्री फॉलो-अप्स की सुविधा भी देते हैं। साथ ही आप 100% इंश्योरेंस क्लेम कर सकते हैं। अगर आप वैरीकोसेल का इलाज लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए कराना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। 

वैरीकोसेल में आपका डाइट कैसा होना चाहिए — How Should Your Diet Be During Varicocele In Hindi — Diet For Varicocele In Hindi — Varicocele Me Apka Diet Kaisa Hona Chahiye 

वैरीकोसेल से पीड़ित होने कि स्थिति में आपको अपनी डाइट पर खास ध्यान देने कि आवश्यकता होती है। डॉक्टर का कहना है कि डाइट में बदलाव लाकर काफी हद तक वैरीकोसेल के लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। इस दौरान जहां आपको कुछ चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए, वहीं कुछ चीजों के सेवन से बचना भी है। हम आपको नीचे इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं। 

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पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। खुद को हमेशा हाइड्रेट रखने कि कोशिश करें। इसके लिए आप पानी के साथ साथ फल के जूस का सेवन भी कर सकते हैं। फल हर तरह से शरीर को फायदेमंद होता है। Best Treatment for Varicocele in Hindi ताजे फलों का सेवन वैरीकोसेल जैसे बीमारी में भी फायदेमंद होता है। विशेषज्ञ का मानना है कि नियमित रूप से फल का सेवन करने से वैरीकोसेल की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। वैरीकोसेल को दूर करने में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन बहुत प्रभावशाली होता है। इसलिए आपको अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।       

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वैरीकोसेल से छुटकारा पाने में फैटी एसिड काफी लाभदायक साबित होता है। अगर आप भी अपनी परेशानी को दूर करना चाहते हैं तो आपको फैटी एसिड वाली चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। अलसी का तेल औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल कई तरह कि बीमारियों और लक्षणों को दूर करने के लिए किया जाता है। आप भी वैरीकोसेल को खत्म करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। वैरीकोसेल की स्थिति में साबुत अनाज का सेवन फायदेमंद होता है। इसके अंदर ढेरों ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो वैरीकोसेल ठीक करने में मदद करते हैं। 

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मछली और मछली का तेल भी वैरीकोसेल की परेशानी को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। आप इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। जैतून के तेल का इस्तेमाल ढेरों परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है। इन्ही परेशानियों में से एक वैरीकोसेल है। इन सबके अलावा, आपको अपनी डाइट में फ्लेवोनोइड्स को अवश्य शामिल करना चाहिए। क्यों यह ब्लड वेसेल्स को मजबूत बनाता है। 

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वैरीकोसेल से पीड़ित होने की स्थिति में आपको काफी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। जंक और प्रोसेस्ड फूड्स से दूर रहें। नकली मक्खन का सेवन करने से बचें। पशु के चर्बी से बनी चीजों का सेवन न करें। हाइड्रोजन कृत तेल के इस्तेमाल से बचना चाहिए। कैफीन का कम से कम सेवन करें या फिर इसे छोड़ दें। Best Treatment for Varicocele in Hindi चीनी का सेवन वैरीकोसेल के लक्षणों को बढ़ावा देता है। इसलिए इसके सेवन से बचना चाहिए। शराब से खुद को दूर रखें। क्योंकि यह वैरीकोसेल की समस्या को गंभीर बनाने का काम करता है। वैरीकोसेल से पीड़ित होने कि स्थिति में आपको रिफाइंड सफेद आटा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर आप ऊपर बताई गई बातों को फॉलो करते हैं तो इनकी मदद से आधे से ज्यादा आपकी बीमारी ठीक हो जाएगी।

निष्कर्ष — Conclusion

वैरीकोसेल की समस्या किसी भी वयस्क पुरुष को प्रभावित कर सकती है। इसका बेस्ट इलाज संभव है जिसकी मदद से इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। अगर आप खुद में इसके किसी भी लक्षण को अनुभव करते हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसका जांच और इलाज कराना चाहिए। हालांकि, वैरीकोसेल के इलाज के लिए ढेरों उपचार के तरीके मौजूद हैं लेकिन लेप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा इसका इलाज सबसे बेस्ट माना जाता है। क्योंकि यह वैरीकोसेल का स्थायी इलाज है, इसके बाद आपको दोबारा भविष्य में इस समस्या का सामना करने की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।      

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