Piles Ke Masse Ka Ilaj

बवासीर का मास्सा बहुत ही दुःख और तकलीफ देने वाला रोग है, जिसमे काफी दर्द होने पर रोगी को काफी परेशानी होती है। बवासीर के मस्से की बीमारी के टाइम गुदा के अंदर और गुदा के आसपास वाली जगह पर सूजन होती है। गुदा जो है वो बड़ी आंत के नलिका के अंतिम हीसे को कहते है। ये लगभग ४ सेंटीमीटर तक लम्बा होता है और ये गुदा नलिका के निचले सिरे पर बहार की तरफ खुलता है। बवासीर जो है वो २ टाइप की होती है- अंदर और बहार। अंदर वाली जो बवासीर है उसमे जो गुड्स नलिका के अंदर २-३ सेंटीमीटर ऊपर होती है। अंदर वाली बवासीर मे दर्द कम होता है क्युकी ये ऊपर स्तिथ होती है। आये इस आर्टिकल के माध्यम से जानते है पाइल्स के मस्से का इलाज।

पाइल्स के मस्से का इलाज

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ज़्यदातर केसेस मे, बिना किसी ट्रीटमेंट के ही पाइल्स तीख हो जाता है। बहुत सरे पेशेंट्स ने ये देखा है की ट्रीटमेंट के बाद उन्हें दर्द और खुजली से काफी रहत मिली है। कॉन्स्टिपेशन के कारन मल तयाग करने पर बहुत ही ज़्यदा ज़ोर लगता है, जिसके कारन से बवासीर होता है। डाइट मे चेंज के बाद मल नियमित मात्रा मे होता है। अपने खाने मे फाइबर को इन्क्लुडे करना चाइये, जैसे की फल और सब्जिया खाये। इसके अल्वा पानी सबसे ज़्यदा इम्पोर्टेन्ट चीज़ है और रोगी को यही सलाह दी जाती है की पानी का सेवन ज़्यदा करे। जिन चीज़ो मे कैफीन होता है, उनको कम करे। अगर मरीज मोटापे से पीड़ित, तो अपना वजन कम करने से बवासीर को रोका जा सकता है।

अन्य दवाइये और उपाय

कुछ दवाइयों के इस्तेमाल से मलष्य के आस पास होने वाली सूजन से आराम मिलता है। इसमें विच हेज़ल, जैसी सामगिरि होती है जो खुजली से रहत प्रधान करते है। इन दवाइयों से पाइल्स टिक नहीं होता है बस पाइल्स के लक्षण टिक होते है। इन दवाइयों को लगातार ७ दिन तक उसे करने पर टिक होजाते है, लेकिन इन्हे ७ दिन से ज़्यदा इस्तेमाल ना करे वर्ण ये मलष्य के समय गलत इफ़ेक्ट देंगे। डॉक्टर से बिना सलाह के कोई भी दवाई न ले।

  • कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स: यह जलन और दर्द को काम करने मे हेल्प करता है।
  • दर्द निवारक दवाइया: पर्सेटामॉल जैसी दवाइयों का भी इस्तेमाल कर सकते है।
  • बैंडिंग: जो डॉक्टर है वो मलष्य के अंदर, पाइल्स के आस पास वाली जगह पर बैंड लगा देता है, जिससे ब्लड लोस्स रुक जाता है। ये इलाज बवासीर की ग्रेड २ और ग्रेड ३ के लिए किया जाता है।

सर्जरी

  • स्क्लेरोथेरपी: इस थेरेपी मे एक दवाई दी जाती है जिसमे पाइल्स सिकुड़ जाता है और फिर बाद मे सुख जाता है। यह बवासीर की ग्रेड २ और ३ को तीख करने मे सक्षम है।
  • इंफ्रारेड कगलतिओं: इस पर्किर्या को इंफ्रारेड कगलतिओं भी कहते है। इसका इस्तेमाल पाइल्स की ग्रेड १ और २ मे किया जाता है। इसमें बवासीर के मस्सो की जमावट को रौशनी के द्वारा जला दिया जाता है।
  • जनरल सर्जरी: इस प्रोसीजर को बड़ी बवसीर को तीख करने के लिए उसे किया जाता है, यानि के ग्रेड ३ और ४ बवासीर के लिए यह सही उपाय है। यह सर्जरी तभी ही की जाती है जब दूसरी सर्जरी से आराम नहीं मिलता। ये सर्जरी ोत्पाटिएंट प्रक्रिया की तरह किया जाता है, जिसके बाद पेशेंट अपने घर जा सकता है।
  • हेमोर्रोइडेक्टमी: बहुत सरे मस्से जिनकी वजह से खून आता है उन्हें हटा दिया जाता है सर्जरी की मदद से। इसमें पेशेंट को अनेस्थेटिक दिए जाता है। यह सर्जरी पाइल्स को जड़ से मिटने मे सक्षम है। इस सर्जरी मे थोड़ी रिस्क्स बढ़ जाती है, जैसे मल निकलने मे दिक्कत और इन्फेक्शन की सम्भवनाये।
  • हेमोर्रोइड को बांधना: इसमें बवासीर के कारन बह रहे खून को रोक दिया जाता है। ये प्रोसेस हेमोर्रोइडेक्टमी ये कम पेनफुल होता है। लेकिन इसमें बवासीर के दुबारा होने का खतरा बढ़ जाता है।
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